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सुबह बलगम में खून आना घरेलू उपचार

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सुबह बलगम में खून आना घरेलू उपचार

सुबह बलगम में खून आना घरेलू उपचार

सुबह के समय बलगम में खून का आना एक चिंताजनक स्थिति हो सकती है, जिसके बहुत से कारण हो सकते हैं जिसके विषय में हम आपको आगे इस आर्टिकल में बताएंगे, पर बहुत ये समस्या ज्यादा गंभीर नहीं होती है,  लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। अगर ये समस्या बार-बार सुबह हो रही है, तो इस समस्या पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, आज इस आर्टिकल में हम बताएंगे सुबह बलगम में खून आना घरेलू उपचार साथ ही इसके लक्षणों और कारणों पर भी हम विचार करेंगे, जिससे बिना किसी साइड इफेक्ट के हमें सुरक्षित उपाय मिल पाए।  
बलगम में खून

सुबह बलगम में खून आने के लक्षण 

  • खूनी बलगम - यह संकेत हो सकता है कि फेफड़ों या श्वसन तंत्र में कोई संक्रमण, सूजन या गंभीर समस्या हो रही है।

  • सूखी या लगातार खांसी - बलगम में खून आना टीबी, ब्रोंकाइटिस या फेफड़े के कैंसर जैसी बीमारियों का लक्षण हो सकता है।

  • सीने में दर्द या जकड़न -  खांसी करते समय या सामान्य रूप से सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना श्वसन संबंधी समस्या दर्शाता है।

  • साँस लेने में तकलीफ़ - सांस फूलना या गहरी सांस लेने में परेशानी होना फेफड़ों की क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है।

  • बुखार और ठंड लगना - संक्रमण की उपस्थिति में शरीर का तापमान बढ़ सकता है और ठंड लगने की शिकायत हो सकती है।

  • अन्य संबंधित लक्षण - वजन कम होना, थकान, रात को पसीना आना जैसे लक्षण भी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।

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सुबह बलगम में खून आने के कारण 

  • गले या नाक की सूजन - गले या नाक में सूजन या संक्रमण के कारण छोटे रक्तवाहिकाएं फट सकती हैं, जिससे बलगम में खून आ सकता है।

  • टीबी - टीबी एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है, जिसमें खांसी के साथ खून आना आम लक्षण होता है।

  • निमोनिया - बैक्टीरियल या वायरल निमोनिया में फेफड़ों में सूजन और संक्रमण के कारण खून वाली खांसी हो सकती है।

  • नाक से खून आना - सोते समय या सुबह नाक से हल्का खून निकलकर बलगम में मिल सकता है।

  • धूम्रपान और प्रदूषण - लम्बे समय तक धूम्रपान या प्रदूषण के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र में सूजन होकर खून आ सकता है।

  • श्वसन संक्रमण - सामान्य फ्लू या अन्य वायरस के कारण श्वसन तंत्र में जलन और खून वाली खांसी हो सकती है।

  • फेफड़ों की चोट या फेफड़े का कैंसर -  किसी चोट या गंभीर रोग जैसे कैंसर के कारण फेफड़ों से खून आ सकता है।

  • नाक से खून आना -  किसी चोट या गंभीर रोग जैसे कैंसर के कारण फेफड़ों से खून आ सकता है।

सुबह बलगम में खून आना घरेलू उपचार

  1. शहद और अदरक का सेवन

  2. हल्दी वाला दूध

  3. भाप लेना

  4. नमक के पानी से गरारे 

  5. तुलसी और मुलेठी का काढ़ा

 

  1. शहद और अदरक का सेवन - सुबह बलगम में खूनसुबह बलगम में खून अगर  गले की सूजन, हल्की खांसी, या किसी संक्रमण के कारण हो रही है तो शहद और अदरक इस स्तिथि में काफी फायदेमंद हो सकता है, अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो गले की सूजन को कम करते हैं और सांस की नलियों में जमा बलगम को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करते हैं। वहीं दूसरी ओर शहद एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, जो गले की परत पर एक सुरक्षात्मक परत बनाकर संक्रमण से लड़ता है और सूजन को कम करता है। इसमें मौजूद एंजाइम्स और एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे अंदरूनी सूजन जल्दी ठीक होती है।
    शहद और अदरक

  2. हल्दी वाला दूध -  हल्दी वाला दूध एक पारंपरिक लेकिन प्रभावशाली घरेलू उपाय है, पर ये उपाय तब बहुत असरदार होता है जब खून आना हल्की खांसी, गले में संक्रमण या फेफड़ों की सूजन के कारण हो रहा हो। इसकी खासियत ये है की हल्दी में करक्यूमिन होता है जो शरीर में सूजन और संक्रमण को कम करने में मदद करता है। और जब यह गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो यह शरीर को भीतर से गर्माहट देता है, जिससे गले और छाती में जमा बलगम धीरे-धीरे ढीला होकर बाहर निकलने लगता है।
     

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    3. भाप लेना - सुबह बलगम में खून आने की स्थिति में भाप लेना बहुत ही असरदार और आसान घरेलू उपाय है, खासकर अगर यह समस्या बलगम के जमाव, सर्दी-जुकाम या हल्की खांसी के कारण हो रही हो। तो भाप लेने से सबसे पहला लाभ यह होता है कि यह सांस की नलियों को खोलता है और फेफड़ों में जमा गाढ़े बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है। हालांकि यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि भाप लेना तभी उपयोगी है जब खून आना किसी हल्के या अस्थायी कारण से हो। अगर आपके मन में ये सवाल आए की बलगम में खून दिखे तो क्या करें तो आप ये सरल उपाय अपना सकते हैं। 
    भाप लेना

  4. नमक के पानी से गरारे - नमक के पानी से गरारे करना एक बहुत ही आसान, सस्ता और असरदार घरेलू उपाय है, नमक में नैचुरल एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो गले में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने में मदद करते हैं। यह गले की अंदरूनी सफाई करता है और बलगम को ढीला करके बाहर निकालने में सहायक होता है, जिससे खांसी की तीव्रता कम होती है। और गुनगुना पानी खुद में ही एक सूजन कम करने वाला तत्व है, और जब उसमें नमक मिलाया जाता है, तो यह और प्रभावी हो जाता है। 
    तुलसी और मुलेठी का काढ़ा

  5. तुलसी और मुलेठी का काढ़ा - तुलसी और मुलेठी दोनों के मिश्रण से बना  काढ़ा क प्राचीन और प्रभावशाली आयुर्वेदिक उपाय है, जो तब सबसे ज़्यादा असरदार होता है जब यह समस्या खांसी, गले की खराश, या फेफड़ों में हल्के संक्रमण के कारण हो रही हो। क्योंकि मुलेठी एक अत्यंत प्रभावशाली जड़ी-बूटी है जिसे आयुर्वेद में कंठशुद्धि और कंठरक्षक कहा गया है। इसमें मौजूद ग्लाइसीर्रिज़िन गले की सूजन और जलन को शांत करते हैं, और तुलसी में प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो गले और श्वसन तंत्र को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं। और ये दोनों मिलकर खांसी में खून आने के देसी इलाज बनते हैं। 

 

FAQ

 

  • सुबह कफ में खून क्यों आता है?
     सुबह कफ में खून आना गले या फेफड़ों की सूजन, संक्रमण जैसे टीबी, निमोनिया, धूम्रपान, नाक से खून या फेफड़ों की गंभीर बीमारी के कारण हो सकता है।

     
  • आपको कैसे पता चलेगा कि आपके फेफड़ों या गले से खून आ रहा है?
    अगर खून खांसी या कफ के साथ आता है, गले में जलन या खिचखिच होती है, और खून झागदार या बलगम में मिला हो, तो खून फेफड़ों या गले से आ सकता है।

     
  • क्या आपके बलगम में थोड़ा सा खून आना ठीक है? छोटा उत्तर 
    कभी-कभी बलगम में थोड़ा सा खून आना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह बार-बार हो या मात्रा अधिक हो, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
Dr Puneet Dhawan
Ayurvedic Expert

Dr. Puneet Dhawan – Ayurvedic Expert

Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues. With a strong academic background in Ayurveda (BAMS) and years of clinical experience, the blend of Ayurvedic wisdom with practical lifestyle guidance in his treatment approach has helped thousands overcome their health issues.

His USP is not just personalized herbal treatments, but meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms. His friendly nature, clear explanations, and commitment to promoting safe, holistic healing through Ayurveda stand out in the PR dominated world.

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