क्रिएटिनिन हमारे शरीर में ही मौजूद होते हैं, ये क्रिएटिन नामक रसायन से आते हैं। क्रिएटिन का काम हमारे मांसपेशियों में एनर्जी पहुँचाना होता है, और जब इन्ही मांसपेशियों का ब्रेकडाउन होता है तब क्रिएटिनिन बनता है। और हमारी किडनी इसे फ़िल्टर कर के यूरिन के ज़रिये बाहर कर देती है। पर जब किडनी सही से काम नहीं करती या उसमे कोई खराबी आ जाती है तब ये क्रिएटिनिन को सही से फ़िल्टर कर के नहीं निकाल पाते और शरीर में क्रिएटिनिन की मात्रा बढ़ जाती है। डॉक्टर इसी क्रिएटिनिन को ब्लड और यूरिन के माध्यम से देख कर बता पाते हैं, कि किसी व्यक्ति की किडनी कैसे काम कर रही है, इसलिए आज हम इससे जुडी कुछ चीज़ों के बारे में जानेंगे जैसे इसके लक्षण और क्रिएटिनिन बढ़ने पर क्या नहीं खाना चाहिए।अगर क्रिएटिनिन बढ़ गया है, तो आपको अपनी डाइट में कुछ बदलाव करने की जरूरत है ताकि किडनी को नुकसान से बचाया जा सके। प्रोटीन युक्त आहार, जैसे लाल मांस (बीफ, पोर्क), मछली, अंडे अधिक मात्रा में न खाएं, क्योंकि ये किडनी पर दबाव डालते हैं। डेयरी उत्पाद, जैसे दूध, पनीर और दही भी सीमित करें। ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड (जैसे पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड) से बचें, क्योंकि ये ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सोडा, कैफीन और शराब से भी दूरी बनाएं। सही डाइट अपनाकर क्रिएटिनिन को नियंत्रित किया जा सकता है
क्रिएटिनिन के लक्षण
- रुखी त्वचा
- साँस लेने में दिक्कत
- मांसपेशिओं में दर्द
- सोने में दिक्कत
- खुजली
- उल्टी
- सोने के समय दिक्कत
क्रिएटिनिन बढ़ने पर क्या नहीं खाना चाहिए
- रेड मिट
- डेरी प्रोडक्ट
- केला
- ज़्यादा तेल मसाले वाला खाना
- कोल्ड ड्रिंक
चिकित्सक सलाह के लिए फॉर्म भरें
जैसा कि हमने आपको बताया कि क्रिएटिनिन बढ़ने की स्थिति में क्या नहीं खाना चाहिए, अब हम इन सभी के कारणें के बारे में विस्तार से बताएँगे:
1. रेड मीट

रेड मीट में हाई प्रोटीन होता जो किडनी पर और भार डालता है, जिसे शरीर में और भी टोक्सिन बढ़ सकते हैं जिससे किडनी फ़ैल होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
2. डेयरी प्रोडक्ट

डेयरी प्रोडक्ट को भी इसके हाई प्रोटीन, पोटैशियम और हाई फॉस्फोरस वाले गुणें कि वजह से हाई क्रिएटिनिन वाले व्यक्तियों के लिए, मना कर दिया जाता है। क्योंकि फॉस्फोरस हृदय और हड्डियों पर भी भार दाल सकता है। इसलिए वो सभी खाद्य पदार्थ जिसमें ये सभी मिनरल्स होते हैं उनको अपने दिनचर्या में रोकना या एक दम ही कम खाना चाहिए।
3. केला

किसी भी शरीर के लिए पोटैशियम बहुत ज़रुरी होता है, और केले में ज़्यादा मात्रा में पोटैशियम होता है, इसलिए हाई क्रिएटिनिन से पीड़ित व्यक्तियों को केला खाना मना होता है, क्योंकि किडनी हमारी इस समय सही से पोटैशियम को फ़िल्टर नहीं कर पाता और शरीर में पोटैशियम के बढ़ने के कारण बहुत से बुरे प्रभाव पद सकते हैं जैसे मांसपेशियों का कमज़ोर हो जाना, हृदय पर बुरा प्रभाव पड़ना और जानलेवा अटैक जैसी संभावनाएं बन सकती है।
अभी फॉर्म भरें और विशेषज्ञ से परामर्श करें
4. ज्यादा तेल और मसाले वाला खाना

तेल मसालों वाले खाने में सोडियम का स्तर ज्यादा होता हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जो किडनी के फंक्शन को और भी बिगाड़ सकता है इसलिए एसा भोजन करें जिसमे सोडियम की मात्रा कम हो।
5. कोल्ड ड्रिंक

कोल्ड ड्रिंक में बहुत सी चीज़े होती है, जिसके बहुत बुरे प्रभाव पड़ते हैं। जिस वजह से इसे सख्त मना कर दिया जाता है, जैसे कोल्ड ड्रिंक में सोडियम की बहुत मात्रा होती है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है, चीनी की मात्रा भी ज़्यादा होती है जो रक्त में ग्लूकोज़ के लेवल को बढ़ा देती है और कैफीन डिहाइड्रेशन की समस्या दे सकता है जिससे किडनी में पथरी होने का डर होता है।
निष्कर्ष
हमारे द्वारा बताये गये इन सभी लक्षणों में से अगर आप किसी से भी परेशान हैं या कोई शंका हो तो डॉक्टर से जल्द ही सम्पर्क करें क्योंकि हाई क्रिएटिनिन के लक्षण बहुत जल्दी नज़र नही आते हैं, और इन सभी चीज़ों से परहेज़ करें, हो सके तो अपना एक डाइट प्लान बना कर रखें जिससे आपको ज़्यादा परेशानी ना हो और एसे ही हेल्थ से जुड़े आर्टिकल पढने के लिए जुड़े रहें आयु कर्मा के साथ।
Dr. Puneet Dhawan
Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues.
His USP is meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms.