
सोरायसिस में कौन से भोजन से परहेज करें?
सोरायसिस एक ऐसी त्वचा से जुड़ी बीमारी है जो केवल बाहरी समस्या नहीं होती है, बल्कि यह शरीर के अंदर चल रही सूजन और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी से जुड़ी होती है। बहुत बार अगर दवाइयों के साथ-साथ खान-पान पर ध्यान न दिया जाए, तो सोरायसिस समय के साथ बार-बार बढ़ जाता है। इसलिए सोरायसिस में क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों से परहेज करना चाहिए, यह जानना बहुत ज़रूरी हो जाता है।
सोरायसिस क्या है और इसमें खान-पान की क्या भूमिका होती है?
सोरायसिस एक ऐसी क्रॉनिक ऑटोइम्यून डिज़ीज़ होती है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपनी ही त्वचा की कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। जिस वजह से त्वचा की कोशिकाएँ सामान्य से कई गुना तेज़ी से बनने लगती हैं, जिससे
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त्वचा पर लाल चकत्ते,
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सफेद पपड़ी,
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खुजली,
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जलन और
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कभी-कभी दर्द भी होने लगता है
खान-पान की भूमिका यहाँ बहुत जरूरी हो जाती है, क्योंकि हमारा खाना सीधे तौर पर शरीर की सूजन, इम्यून सिस्टम और पाचन शक्ति को प्रभावित करता है। और गलत भोजन आसानी सूजन को बढ़ा सकता है, जिससे सोरायसिस के लक्षण तेज़ हो जाते हैं, जबकि सही डाइट सूजन को शांत करके फ्लेयर-अप को कम करने में मदद कर सकती है।
सोरायसिस के कारण क्या हैं?
सोरायसिस होने के पीछे एक ही कारण नहीं होता, बल्कि कई कारण मिलकर इस बीमारी को जन्म देते हैं। इसमें जेनेटिक फैक्टर यानी पारिवारिक इतिहास की भूमिका अहम होती है। इसके अलावा भी कुछ कारण
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तनाव
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बार-बार संक्रमण
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हार्मोनल असंतुलन
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धूम्रपान
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शराब का सेवन
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अस्वस्थ जीवनशैली भी सोरायसिस को ट्रिगर कर सकती है
गलत खान-पान भी एक बड़ा कारण माना जाता है। ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड और केमिकल-युक्त भोजन शरीर में विषैले तत्वों को बढ़ाता है, जिससे इम्यून सिस्टम और ज्यादा एक्टिव हो जाता है और सोरायसिस की समस्या गहराती जाती है।
क्या गलत भोजन सोरायसिस को बढ़ा सकता है?
हाँ, बिल्कुल। गलत भोजन सोरायसिस को न केवल बढ़ा सकता है, बल्कि इलाज के असर को भी कम कर सकता है। ऐसा भोजन जो शरीर में सूजन बढ़ाता है, पाचन को बिगाड़ता है और टॉक्सिन्स जमा करता है, वह सोरायसिस के लिए हानिकारक होता है।
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ज्यादा चीनी
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मैदा
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फास्ट फूड
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पैकेज्ड स्नैक्स
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कोल्ड ड्रिंक्स
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तला-भुना भोजन
बताए गई ये सभी चीज़ें शरीर में सूजन को बढ़ाता है। इससे त्वचा की जलन, खुजली और पपड़ी और ज्यादा बढ़ सकती है। कई मरीजों में देखा गया है कि गलत डाइट लेने पर फ्लेयर-अप जल्दी और ज्यादा गंभीर हो जाते हैं।
सोरायसिस के मरीजों को डेयरी प्रोडक्ट्स से क्यों सावधान रहना चाहिए?
डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे -
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दूध
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पनीर
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चीज़
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मक्खन
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आइसक्रीम
कुछ लोगों में सोरायसिस के लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसका कारण यह है कि डेयरी में पाए जाने वाले फैट और कुछ प्रोटीन शरीर में सूजन को बढ़ा सकते हैं।
कई सोरायसिस मरीजों में डेयरी प्रोडक्ट लेने से खुजली बढ़ना, त्वचा का लाल होना और पपड़ी ज्यादा बनना देखा गया है। हालांकि यह हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को कम मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट लेने से समस्या नहीं होती, लेकिन फ्लेयर-अप के समय डेयरी से परहेज करना ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है।
सोरायसिस में किन सब्ज़ियों या खाद्य पदार्थों से कुछ लोगों को समस्या हो सकती है?
सोरायसिस में कुछ खास सब्ज़ियाँ और खाद्य पदार्थ कुछ मरीजों के लिए ट्रिगर बन सकते हैं। खासकर नाइटशेड सब्ज़ियाँ जैसे -
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टमाटर
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आलू
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बैंगन
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शिमला मिर्च
कुछ लोगों में सूजन बढ़ा सकती हैं। इनमें मौजूद कुछ तत्व शरीर में इन्फ्लेमेटरी रिएक्शन को बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन, अचार, सिरका, ज्यादा नमक और आर्टिफिशियल फ्लेवर बढ़ाने वाले पदार्थ भी त्वचा की समस्या को बढ़ा सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हर व्यक्ति को इनसे दिक्कत हो, लेकिन सोरायसिस के मरीजों को अपने शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।
परहेज न करने पर सोरायसिस के लक्षण कितने गंभीर हो सकते हैं?
अगर सोरायसिस में खान-पान का ध्यान न रखा जाए, तो इसके लक्षण समय के साथ और ज्यादा गंभीर भी हो सकते हैं। शुरुआत में केवल हल्की खुजली या पपड़ी हो सकती है, लेकिन समय के साथ त्वचा में दरारें पड़ना, खून निकलना, जलन और दर्द जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।यही नहीं कुछ मामलों में सोरायसिस जोड़ों तक भी फैल सकता है, जिसे सोरायटिक आर्थराइटिस कहा जाता है। इसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न होने लगती है। इसलिए ये ध्यान रखना बहुत जरूरी है की गलत भोजन शरीर की सूजन को बढ़ाकर इस स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
क्या सही डाइट से सोरायसिस के फ्लेयर-अप कम किए जा सकते हैं?
हाँ, सही डाइट से सोरायसिस के फ्लेयर-अप को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए ऐसा खाना खाएं जो शरीर को ठंडक दे, पाचन को मजबूत बनाए और सूजन को कम करे, जो सोरायसिस में बहुत फायदेमंद होता है।
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ताजे फल
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हरी सब्ज़ियाँ
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साबुत अनाज
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पर्याप्त पानी
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हल्का भोजन
ये सभी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। साथ ही जब शरीर के अंदर की सूजन कम होती है, तो उसका सीधा असर त्वचा पर भी दिखाई देता है और सोरायसिस के लक्षण धीरे-धीरे शांत होने लगते हैं।
सोरायसिस में भोजन से परहेज कितने समय तक करना चाहिए?
सोरायसिस एक ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक चलती है, इसलिए इसमें भोजन से परहेज को कुछ दिनों या महीनों की चीज़ नहीं समझना चाहिए। जब तक बीमारी कंट्रोल में न आ जाए और फ्लेयर-अप बार-बार हो रहे हों, तब तक ट्रिगर करने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखना ही ज़रूरी है। कई मरीजों को लंबे समय तक सही डाइट फॉलो करने पर यह समझ आने लगता है कि कौन-सा खाना उनके लिए सही है और कौन सा नहीं। इसलिए बेहतर यही है कि सोरायसिस को मैनेज करने के लिए खान-पान को एक लाइफस्टाइल चेंज की तरह अपनाया जाए, न कि अस्थायी परहेज के रूप में।
इस आर्टिकल में आज हमने आपको बताया, सोरायसिस में कौन से भोजन से परहेज करें जिसमें हमने सोरायसिस और भोजन से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश कि है, पर आप केवल इस आर्टिकल पर निर्भर न रहे अगर समस्या गंभीर है तो जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें और ऐसे ही ब्लॉग्स और आर्टिकल के लिए जुड़े रहें आयु कर्मा के साथ। यही नहीं ज्यादा जानकारी और डॉक्टर की सलाह के लिए आज ही फोन करें +91 9971119811
FAQ
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सोरायसिस को ठीक करने के लिए क्या खाना चाहिए?
सोरायसिस में हरी सब्ज़ियाँ, फल, साबुत अनाज, अलसी और ज़्यादा पानी फायदेमंद होते हैं, जबकि तला-भुना और मसालेदार खाना कम करना चाहिए। -
क्या सोरायसिस में चावल खा सकते हैं?
हाँ, सोरायसिस में चावल खा सकते हैं, लेकिन बेहतर है कि सफेद चावल की बजाय सीमित मात्रा में ब्राउन राइस या अच्छी तरह पके सादे चावल लें और ज़्यादा मसाले या तला-भुना साथ में न खाएँ। -
क्या सोरायसिस में दही खा सकते हैं?
सोरायसिस में दही कुछ लोगों को सूट करता है और कुछ को नहीं, इसलिए अगर दही खाने से खुजली या सूजन बढ़ती लगे तो इसे कम करें, वरना सीमित मात्रा में सादा दही लिया जा सकता है। -
क्या सोरायसिस में नींबू ले सकते हैं?
हाँ, सोरायसिस में नींबू लिया जा सकता है, क्योंकि इसमें antioxidants होते हैं, बस बहुत ज़्यादा मात्रा में या खाली पेट लेने से बचना चाहिए।

Dr. Puneet Dhawan
Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues.
His USP is meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms.
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