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फेफड़ों की टीबी का इलाज कितने दिन चलता है

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फेफड़ों की टीबी का इलाज कितने दिन चलता है

फेफड़ों की टीबी का इलाज कितने दिन चलता है

फेफड़ों की टीबी मायकोबैक्टीरियम ट्युबरक्युलोसिस नाम के बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है वर्ना समय के साथ ठीक से इलाज न की जाए, तो ये बीमारी एक गंभीर रूप ले सकती है। और सबसे अच्छी बात ये है की फेफड़ों की टीबी का इलाज संभव है और पूरी तरह से ठीक होना भी संभव है। आज इस आर्टिकल में हम फेफड़ों की टीबी का इलाज केविषय में बात करेंगे साथ ही इसके लक्षणों और कारणों पर ध्यान देंगे जिससे घरेलू उपचारों से ये समस्या में सुधार आ सके।  और यदि हम बात करें की टीबी का इलाज कितने दिन चलता है? तो इसका इलाज दिन नहीं अवधि के रूप में बताया जा सकता है, जो आम तौर पर लंबी अवधि तक चलता है। इसकी अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि रोग किस प्रकार का है, साधारण टीबी (Drug-sensitive TB) या दवाइयों के प्रति प्रतिरोधी टीबी (Drug-resistant TB)

फेफड़ों की टीबी के लक्षण 

फेफड़ों की टीबी के कारण 

  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली

  • पर्यावरणीय कारण और जीवनशैली

  • धूम्रपान

फेफड़ों की टीबी का इलाज
 

  1. प्रोटीन युक्त आहार - टीबी की समस्या में शरीर समय के साथ कमजोर हो जाता हैं, इसका असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। इस बीमारी के दौरान शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें काफी बढ़ जाती हैं, खासकर प्रोटीन की। प्रोटीन न केवल एक ऊर्जा स्रोत है, बल्कि यह शरीर की मरम्मत और रक्षा प्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाता है।

    प्रोटीन युक्त आहार

     

  2. आयरन और कैल्शियम - टीबी के असर से बहुत बार रोगी का खून कम हो सकता है,  हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और मांसपेशियां थकने लगती हैं। ऐसे में आयरन और कैल्शियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की भूमिका बहुत जरूरी हो जाती है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो खून में ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाता है। वहीं, कैल्शियम शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों के लिए जरूरी खनिज है।

    आयरन

  3. विटामिन C - टीबी की समस्या में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बहुत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कुछ खास पोषक तत्व, जैसे कि विटामिन C, शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं और दवाओं के असर को भी बेहतर बनाते हैं, यही नहीं टीबी का कारण बनने वाला बैक्टीरिया शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं। विटामिन C इन हानिकारक प्रभावों को कम करने का काम करता है और कोशिकाओं को नुकसान से भी बचाता है।
    हल्दी वाला दूध

  4. हल्दी वाला दूध -  हल्दी वाला दूध  टीबी की समस्या में बहुत फायदेमंद हो सकता है, हल्दी में सक्रिय यौगिक गुण होते हैं जो बेहद प्रभावशाली एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीइंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं। फेफड़ों की टीबी में जहां बैक्टीरिया फेफड़ों में सूजन और टिशू डैमेज करता है, वहां हल्दी इन सूजन को कम करने में मदद करती है, दूसरी ओर, दूध प्रोटीन, कैल्शियम और जरूरी विटामिन्स का एक अच्छा स्रोत है। जब दूध में हल्दी मिलाई जाती है, तो यह मिश्रण शरीर को गर्माहट, ऊर्जा और पोषण प्रदान करता है, जो टीबी के मरीज को बहुत आवश्यक होता है। 
    भाप लेना

  5. भाप लेना - फेफड़ों की टीबी के मरीजों को खांसी, बलगम, सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में सूजन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भाप लेने से फेफड़ों और श्वसन तंत्र में जमे बलगम को ढीला करने में मदद मिलती है। टीबी में गाढ़ा बलगम अक्सर फेफड़ों में जमा हो जाता है, जिससे खांसी बढ़ती है और सांस लेने में परेशानी होती है। गर्म भाप इन श्वसन मार्गों में पहुंचकर बलगम को नरम और पतला बनाती है, जिससे उसे बाहर निकालना आसान हो जाता है और फेफड़े हल्के महसूस होते हैं।

आज के इस आर्टिकल में हमने फेफड़ों की टीबी का इलाज, के बारे में, बात करी और आपने जाना की कैसे कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार इस समस्या में आपके काम आ सकते हैं, पर यदि आपके मन में अभी भी प्रश्न आ रहे हो की टीबी ठीक होने में कितना समय लगता है या टीबी की दवा कितने समय तक लेनी चाहिए तो टीबी पूरी तरह से ठीक होने में आमतौर पर 6 महीने का समय लगता है — अगर मरीज को सामान्य फेफड़ों की टीबी (Drug-sensitive Pulmonary TB) है और वह नियमित रूप से दवाएँ ले रहा है। लेकिन आप सिर्फ इन सुझावों पर निर्भर ना रहें समस्या अगर ज्यादा गंभीर है तो डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेद अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें अयुकर्मा के साथ




 

FAQ

क्या टीबी के बाद फेफड़े पूरी तरह ठीक हो जाते हैं?

टीबी के बाद फेफड़े पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, लेकिन यह बीमारी की गंभीरता, इलाज की समय पर शुरुआत, दवाओं की नियमितता, और व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

कौन सी TB सबसे खतरनाक है?

सबसे खतरनाक TB है – मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) और उससे भी खतरनाक रूप है एक्स्टेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (XDR-TB)।

टीवी के मरीज को सबसे ज्यादा क्या खाना चाहिए?

टीवी के मरीजों को उच्च प्रोटीन, आयरन, विटामिन्स और मिनरल्स का सेवन करना चाहिए। 


 

Dr Puneet Dhawan
Ayurvedic Expert

Dr. Puneet Dhawan – Ayurvedic Expert

Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues. With a strong academic background in Ayurveda (BAMS) and years of clinical experience, the blend of Ayurvedic wisdom with practical lifestyle guidance in his treatment approach has helped thousands overcome their health issues.

His USP is not just personalized herbal treatments, but meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms. His friendly nature, clear explanations, and commitment to promoting safe, holistic healing through Ayurveda stand out in the PR dominated world.

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