आपकी सभी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा अनुशंसित आयुर्वेदिक उपचार, उपचार और सलाह
आजकल के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। प्रोटीन यूरिया, बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन, बार-बार थकान , सूजनऔर डायलिसिस का डर, ये सभी शब्द अब आम हो चुके हैं। अधिकतर लोगों के मन में एक ही सवाल रहता है कि क्या आयुर्वेद में किडनी का इलाज संभव है, और अगर हाँ, तो किस हद तक?
आयुर्वेद किडनी की बीमारी को बस एक अंग की समस्या ही नहीं मानता, बल्कि पूरे शरीर के असंतुलन के रूप में भी देखता है। इसी दृष्टिकोण के कारण आयुर्वेदिक इलाज को आज भी एक प्रभावी विकल्पों में से एक माना जाता है।
आयुर्वेद में किडनी को “वृक्क” कहा गया है और इसे मूत्र प्रणाली का मुख्य अंग माना जाता है। और आयुर्वेद के अनुसार किडनी का काम केवल मूत्र बनाना ही नहीं होता, बल्कि शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालना और जल-संतुलन बनाए रखना भी होता है। जब वात, पित्त और कफ, इन तीनों दोषों में असंतुलन हो जाता है, तब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। वैसे विशेष रूप से वात दोष की वृद्धि किडनी को कमजोर करती है, जबकि पित्त की अधिकता सूजन और जलन पैदा करती है, और कफ का असंतुलन शरीर में पानी और अपशिष्ट पदार्थों को जमा करने लगता है। और यही नहीं आयुर्वेद किडनी रोग को अचानक होने वाली समस्या नहीं मानता, बल्कि लंबे समय तक चले गलत खान-पान और जीवनशैली का परिणाम भी समझता है।
आयुर्वेद के अनुसार किडनी रोग या किडनी की कमजोरी के पीछे केवल मेडिकल रिपोर्ट्स नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आदतें भी जिम्मेदार होती हैं। अत्यधिक नमक, प्रोसेस्ड फूड, केमिकल युक्त दवाइयों का लंबे समय तक सेवन, अनियमित दिनचर्या और कम पानी पीना किडनी पर अतिरिक्त बोझ डालती है। इसके अलावा, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोग अगर लंबे समय तक नियंत्रित न रहें तो वे भी किडनी को धीरे-धीरे कमजोर कर देते हैं। आयुर्वेद इसे “आम” यानी शरीर में जमा टॉक्सिन की समस्या मानता है, जो समय के साथ किडनी के फिल्टर सिस्टम को नुकसान पहुँचाते हैं।
किडनी रोग के लक्षण शुरुआती समय में काफी हल्के होते हैं, इसलिए अक्सर लोग उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। पर बार-बार थकान महसूस होना, चेहरे या पैरों में सूजन, पेशाब में जलन या झाग आना, भूख कम लगना और नींद न आना, ये सभी संकेत किडनी की कमजोरी की ओर इशारा कर सकते हैं। समय के साथ जैसे ही समस्या बढ़ती है, सांस फूलना, मतली, उल्टी और क्रिएटिनिन का बढ़ना जैसे लक्षण सामने आते हैं। और आयुर्वेद मानता है कि अगर इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते समझ लिया जाए, तो किडनी को गंभीर स्थिति में जाने से पहले रोका जा सकता है।
आयुर्वेद में किडनी की बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है या नहीं या क्या किडनी आयुर्वेद से ठीक हो सकती है?, यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है और इसका जवाब हर मरीज के लिए अलग हो सकता है। क्योंकि आयुर्वेद यह दावा नहीं करता कि हर स्टेज की किडनी बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाएगी, लेकिन आयुर्वेद यह ज़रूर मानता है कि सही समय पर शुरू किया गया इलाज किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है और बीमारी की गति को धीमा भी कर सकता है। शुरुआती और मध्यम अवस्था में आयुर्वेदिक इलाज से कई मरीजों को सुधार देखने को मिलता है। गंभीर अवस्था में भी आयुर्वेद का उद्देश्य किडनी को सहारा देना, लक्षणों को कम करना और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना ही होता है।
ज्यादातर ये कहा जाता है की बिना डायलिसिस किडनी का आयुर्वेदिक इलाज संभव नहीं है या डायलिसिस को किडनी फेल्योर का लास्ट ऑप्शन माना जाता है, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण इससे अलग है। आयुर्वेद का लक्ष्य केवल किडनी की बची हुई क्षमता को मजबूत करना और शरीर में जमे हुए टॉक्सिन्स को कम करना ही नहीं होता है। बल्कि कई मामलों में, जब आयुर्वेदिक इलाज समय पर शुरू किया जाता है और मरीज खान-पान व जीवनशैली में आवश्यक बदलाव भी करता है, तो डायलिसिस की आवश्यकता को टाला या देर से लाया जा सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह मरीज की स्थिति, और नियमितता पर ही निर्भर करता है।
आयुर्वेद में इलाज केवल दवाइयों तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यहाँ सही आहार और जीवनशैली को इलाज का आधा हिस्सा माना गया है। हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन किडनी पर कम दबाव डालता है। वहीं दूसरी ओर ज्यादा नमक, पैकेज्ड फूड और तले हुए पदार्थों से बचने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, नियमित दिनचर्या, अच्छी नींद, हल्का योग और प्राणायाम शरीर के दोषों को संतुलित करने में मदद करते हैं। क्योंकि आयुर्वेद मानता है कि जब तक जीवनशैली नहीं बदली जाती, तब तक किसी भी इलाज का पूरा लाभ भी नहीं मिल सकता है।
सबसे पहले सभी का ये समझना जरूरी है की किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार कोई जादुई प्रक्रिया नहीं होती है, बल्कि यह धीरे-धीरे और गहराई से काम करता है। आमतौर पर शुरुआती सुधार कुछ हफ्तों में महसूस होने लगता है, जैसे सूजन का कम होना, थकान में कमी या भूख का बेहतर होना। पूरा असर देखने के लिए महीनों तक सही आहार, नियमित इलाज और अनुशासित जीवनशैली जरूरी होती है। और सबसे जरूरी, किडनी के लिए आयुर्वेदिक दवा के रूप में धैर्य और निरंतरता को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यही शरीर को खुद को ठीक करने का समय देता है।
आज इस आर्टिकल में आपने जाना, क्या आयुर्वेद में किडनी का इलाज संभव है और जाना की इस स्थिति में आप आयुर्वेद को अपनाकर इस समस्या में सुधार ला सकते हैं या किन स्टेज में कैंसर का इलाज सबसे ज़्यादा सफल होता है? पर ध्यान रखें की आप केवल आर्टिकल पर निर्भर न रहें, ज्यादा समस्या उत्पन्न होने पर जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें। और ऐसे ही आर्टिकल और ब्लॉग के लिए जुड़े रहें आयुकर्मा के साथ। और ज़्यादा जानकारी या डॉक्टर की सलाह के लिए आज ही फोन करें +91 9971119811
FAQ
कौन सी जड़ी बूटियां किडनी को फिर से जीवंत करती हैं?
आयुर्वेद में पुनर्नवा, गोक्षुर, वरुण, पाषाणभेद और मुलेठी जैसी जड़ी-बूटियों को किडनी के लिए उपयोगी माना जाता है।
किडनी के लिए सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?
आयुर्वेद में किडनी के लिए कोई एक “सबसे अच्छी” दवा नहीं मानी जाती, क्योंकि उपचार व्यक्ति की स्थिति, रोग की अवस्था और दोषों के असंतुलन के अनुसार तय किया जाता है।
क्या खराब हुई किडनी ठीक हो सकती है?
यह किडनी की अवस्था पर निर्भर करता है, लेकिन सही इलाज से उसकी कार्यक्षमता में सुधार संभव है।
कौन सी आयुर्वेदिक दवा यानी जड़ी बूटी क्रिएटिनिन कम करती है?
आयुर्वेद में पुनर्नवा, गोक्षुर और वरुण जैसी जड़ी-बूटियों को क्रिएटिनिन नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है, क्योंकि ये किडनी की कार्यक्षमता को सहारा देती हैं।
Sheela Jain
Hi, I'm Sheela. I struggled with painful skin rashes for years. After facing side effects from other medicines, I turned to Ayukarma. The facilities impressed me, and after 1.5 months of treatment, my skin completely healed. I'm so grateful for their care and effective treatment.
Kapil
I'm Kapil from Jhajjar. I had gallbladder stones and wanted an herbal solution. I chose Ayukarma and followed their treatment and diet plan. In a month, my symptoms eased, and scans showed major improvement. After two months, the stones were gone. Truly thankful for their help.
Tina Yadav
I'm Tina from Delhi. I suffered from severe sinus issues for years. After learning about Panchakarma therapy, I visited Ayukarma. The staff was great, and therapy was done as per Ayurvedic texts. After treatment, my symptoms improved significantly. I highly recommend them for sinus problems.
Dravya Mathur
Ayukarma helped me manage proteinuria naturally. The Ayurvedic herbs they prescribed reduced my symptoms without side effects. I’ve noticed improvements in my kidney function too. Their treatment has been safe, effective, and deeply healing. I highly recommend them.
Karan a
My friend’s dad had colon cancer with severe symptoms. After starting treatment at Ayukarma, he showed major improvement in a few months. His recovery is ongoing, and he now strongly recommends Ayukarma for anyone dealing with similar issues.
Sumit Mehra
My aunt, Rita Mehra, had early-stage breast cancer. She began treatment at Ayukarma, and the use of herbal medicines helped prevent the cancer from spreading. Best part, no side effects. Dr. Puneet and the team were excellent throughout. Huge thanks to them!
Kriya
I’m Kriya from Delhi. Diagnosed with early-stage tonsil cancer, I couldn’t tolerate allopathic treatment. Switching to Ayukarma was the best decision. Their herbal therapy eased my symptoms and improved my health significantly. I’m hopeful for a full recovery.
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