क्रिएटिनिन क्या है?
क्रिएटिनिन हमारे शरीर में ही उत्पन्न होने वाला एक अवशिष्ट पदार्थ है। जो शरीर में ऊर्जा उत्पादन के लिए क्रिएटिन नाम के पदार्थ से बनता है ये क्रिएटिन नामक पदार्थ शरीर में मांसपेशियों में ऊर्जा प्रदान करने के लिए पाया जाता है। जब क्रिएटिन एनर्जी का उत्पादन करता है, तो उसका एक हिस्सा क्रिएटिनिन में बदल जाता है। फिर ये रक्त से होकर किडनी में चला जाता है जब किडनी स्वस्थ नहीं होती तब वो अच्छे से क्रिएटिनिन को पेशाब के माध्यम से नहीं निकाल पाती जिससे इसके बढ़ने की सम्भावना बढ़ जाती है, आज इस आर्टिकल में हम क्रिएटिनिन बढने पर क्या खाएं और साथ ही इसके लक्षणों और कारणों पर भी ध्यान देंगे।
क्रिएटिनिन बढ़ने के लक्षण
क्रिएटिनिन बढ़ने के कारण
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क्रिएटिनिन बढ़ने पर क्या खाना चाहिए
- अधिक फाइबर वाले आहार
- ओमेगा 3
- ब्राउन राइस
- सेब का सिरका
- नमक का सीमित सेवन
- प्रोटीन का सीमित सेवन
1. अधिक फाइबर वाले आहार

क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ने पर ज्यादा फाइबर वाले आहार का सेवन करने के कई फायदे हो हैं, खाने में फाइबर का होना आपकी किडनी को हानि से बचाता है और क्रिएटिनिन के स्तर को भी नियंत्रित करने में भी मदद करता है खासकर अगर हम बात करें घुलनशील फाइबर की तो ये शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है इसी के साथ ये पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाता है। वजन और कोलेस्ट्रॉल को कम करना, ब्लडप्रेशर नार्मल करना और बहुत से फायदे देता है।
फाइबर वाले आहार - बादाम, काजू, चना, मुंग, पालक, अरहर, राजमा, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च, लौकी, अंगूर, आम, खरबूजा, सेब आदि।
2. ओमेगा 3

ओमेगा-3 फैटी एसिड एक प्रकार का वसा है, जो स्वस्थ रहता है ये किडनी के कार्य करने की क्षमता को सुधारने में मदद कर सकता है, आहार के रूप में ओमेगा-3 का सेवन सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे किडनी को राहत मिलती है और क्रिएटिनिन का स्तर स्थिर हो सकता है। इससे रक्त को पतला करने में मदद मिलती है साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो तनाव को कम करता है और किडनी की सेहत को बनाए रखने में मदद करता है।
ओमेगा 3 वाले आहार - अलसी के बीज, अखरोट, सोया से बने प्रोडक्ट, चिया सीड्स, कैनोला तेल आदि।
3. ब्राउन राइस

जब क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ता है, उस दौरान ब्राउन राइस एक संपूर्ण अनाज है जो किडनी के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है पाचन को बेहतर बनाता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है और ब्लड शुगर को भी नियंत्रित करता है, इसमें मैग्नीशियम, पोटैशियम, और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स होते हैं, जो किडनी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही ये शरीर में जल संतुलन बनाए रखने में मदद करता है जो क्रिएटिनिन और अन्य टोक्सिन को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
सेवन का तरीका - आप इसके सेवन के लिए दलिया, खिचड़ी, सादा या दाल के साथ भी खा सकते हैं।
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4. सेब का सिरका

सेब का सिरका कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। इसमें एल्कलिन प्रभाव पैदा करता है, जो शरीर के पीएच लेवल को संतुलित करने में मदद करता है। ये detoxifying एजेंट के रूप में भी काम करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स किडनी की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और क्रिएटिनिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यही नहीं ये लिवर की भी कार्यक्षमता में सुधार करता है और जिससे किडनी पर कम दबाव पड़े और क्रिएटिनिन का लेवल कंट्रोल होता है।
जानकारी - हमेशा ध्यान रखें की सेब का सिरका एसिडिक होता है, इसलिए अधिक मात्रा में इसे न लें, हमेशा इसे पानी में मिलाकर ही सेवन करें।
5. नमक का सीमित सेवन

नमक का सेवन अपने आहार में क्रिएटिनिन बढ़ने पर सीमित कर लेना चहिये खासकर तब जब आपकी किडनी सही से कार्य न कर पा रही हो, क्योंकि जब हम नमक ज्यादा खाते हैं तो हमारे शरीर में सोडियम की मात्रा भी बढ़ जाती है इसलिए, नमक का सीमित सेवन किडनी पर अतिरिक्त लोड को कम करता है और उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। यही नहीं कम नमक खाना किडनी स्टोन जैसी समस्या से भी बचाता है, क्योंकि पथरी के लिए नमक खुद एक बहुत बड़ा कारण होता है।
जानकारी - हमेशा बाज़ार में मिलने वाले पैक्ड फ़ूड आइटम को ध्यान से पढ़ें क्योंकि उनमें भी नमक की बहुत मात्रा होती है।
निष्कर्ष
आज इस आर्टिकल में हमने आपको क्रिएटिनिन बढ़ने पर क्या खाना चाहिए इस बारे में बताया पर, हमेशा ध्यान दें की समस्या ज्यादा बढ़ने पर आप चिकित्सक के पास जरुर जाएँ और ऐसे ही स्वास्थ्य से रिलेटेड आर्टिकल्स और ब्लोग्स के लिए जुड़े रहें आयु कर्मा से।
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