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थायराइड का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

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थायराइड का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? – Thyroid Ka Ayurvedic Ilaj Kya Hai?

आयुर्वेदिक उपचार करेगा थायराइड की समस्या दूर – Ayurvedic upchaar karega thyroid ki samasya door 

थकान, अचानक मूड या वजन बढ़ना जैसी परेशानियाँ बिगड़ती थायराइड ग्लैंड के संकेत हैं। जहां मॉडर्न इलाज में सिर्फ हार्मोन की कमी को दवाओं से पूरा किया जाता है, वहीं आयुर्वेद थायराइड को सिर्फ़ एक हार्मोनल समस्या नहीं मानता, बल्कि इसे पूरे शरीर के दोषों के असंतुलन से जुड़ी समस्या मानता है और लक्षणों को दबाने की बजाय जड़ से उपचार करता है। इसलिए, ये ज़रूर जानना चाहिए कि “थायराइड का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?” ताकि आयुर्वेदिक इलाज लेकर रोगी बिना किसी साइड इफेक्ट के ठीक हो सके। साथ ही थायराइड और आयुर्वेद से जुड़ी दूसरी अहम जानकारियाँ लेनी चाहिए जो नीचे दी गई हैं।  

थायराइड क्या है? – Thyroid kya hai?

गर्दन के सामने थायराइड एक छोटी-सी तितली आकार की ग्रंथि होती है जो बॉडी में T3 और T4 हार्मोन बनाती है। इससे ऊर्जा, तापमान, मेटाबॉलिज़्म, वजन, स्किन और बाल सबको कंट्रोल किया जा सकता है। जब ये हार्मोन कम बनते हैं तो हाइपोथायराइड की समस्या होती है, और अगर ये ज़्यादा बनते हैं तो हाइपरथायराइड की समस्या होती है।

आयुर्वेद थायराइड को केवल हार्मोन की गड़बड़ी की समस्या नहीं मानता बल्कि इसे पूरे शरीर के दोषों के असंतुलन और पाचन अग्नि की कमजोरी से जुड़ी गहरी बीमारी मानता है।

महिलाओं में थायराइड के खास लक्षण – Mahilao mein thyroid ke khaas lakshan

  • प्रेग्नेंट होने में दिक्कत

  • पीरियड्स की गड़बड़ी

  • गर्भपात का खतरा

  • वजन कंट्रोल न होना

  • हार्मोनल असंतुलन

पुरुषों में थायराइड के खास लक्षण – Purusho mein thyroid ke khaas lakshan

  • यौन इच्छा में कमी
  • कमजोरी और थकान
  • मांसपेशियों में दर्द
  • वजन में असामान्य बदलाव

किन लोगों को थायराइड होने का खतरा ज़्यादा होता है? – Kin logo ko thyroid hone ka khatra zyada hota hai?

ईन लोगों में थायराइड होने की संभावना ज़्यादा होती है –  

  • जिनके परिवार में थायराइड की बीमारी पहले से रही हो

  • 30 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोग

  • महिलाएँ; इनमें थायराइड की बीमारी पुरुषों की तुलना में 5 से 8 गुना ज्यादा होती है।

  • गर्भवती महिलाएँ और हाल ही में माँ बनी महिलाएँ

  • ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित लोग

  • ज्यादा तनाव लेने वाले लोग

  • खराब लाइफस्टाइल वाले लोग

  • रेडिएशन के कॉन्टेक्ट में आने वाले लोग

  • लंबे वक़्त तक कुछ दवाइयाँ लेने वाले लोग

  • आयोडीन की कमी या ज़्यादा वाले लोग

थायराइड का आयुर्वेदिक कारण – Thyroid ka ayurvedic kaaran

आयुर्वेद के हिसाब से थायराइड के 5 मुख्य कारण होते हैं:

  • मेंटल स्ट्रेस 

  • नींद की कमी 

  • गलत डाइट

  • अनियमित लाइफस्टाइल 

  • शरीर में जमा टॉक्सिन

थायराइड में आयुर्वेदिक डाइट – Thyroid mein ayurvedic diet

हाइपोथायराइड या हाइपरथायराइड, दोनों में ही आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से डाइट का बहुत महत्व है क्योंकि आयुर्वेद थायराइड को पाचन शक्ति और वात, पित्त, कफ के संतुलन से जोड़कर देखता है। इसलिए, थायराइड रोगी को खाना धीरे-धीरे और अच्छे से चबाकर खाना चाहिए, रोज़ एक फिक्स वक़्त पर खाना चाहिए और रात का खाना  हल्का और जल्दी खाना चाहिए।

थायराइड में ये खाएँ – Thyroid mein ye khayein

  • अंकुरित दालें और अनाज जैसे – मूंग दाल, मसूर दाल, जौ, बाजरा

  • लिमिट में मौसमी फल और सब्जियाँ

  • अजवाइन, मेथी, हल्दी

  • साफ़ घी या तिल/सरसों का तेल

थायराइड में ज़रूरी परहेज़ – Thyroid mein zaruri parhez

  • ज़्यादा चीनी और मिठाई न खाएँ

  • जंक फूड, तली-भुनी चीजें न खाएँ

  • बहुत ज़्यादा सोया प्रोडक्ट से दूर रहें

  • ज़्यादा कैफीन और कोल्ड ड्रिंक्स न लें

थायराइड में महिलाओं को आयुर्वेद की सलाह – Thyroid mein mahilaon ko ayurved ki salaah

  • मासिक धर्म का ध्यान रखें - थायराइड असंतुलन में पीरियड रेगुलर नहीं रहते। आयुर्वेद कहता है ज्यादा शारीरिक और मानसिक मेहनत पीरियड के दिनों में कम करें। हल्की, गर्म और आसानी से पचने वाली डाइट लें।

  • स्ट्रेस कम करें - महिलाओं में स्ट्रेस थायराइड को बहुत ज्यादा बढ़ाता है। इसलिए, 5 से 10 मिनट ध्यान करें, 7 से 8 घंटे की नींद लें, रोज़ प्राणायाम करें जैसे अनुलोम-विलोम, ब्रह्मरी। 

  • वजन, बाल झड़ना और थकान की दिक्कत दूर करें  - थायराइड वाली महिलाओं में ये तीन समस्याएँ आम होती हैं। इन्हें दूर करने के लिए सुबह सूरज की हल्की धूप लें। साथ ही आयरन, B12 और विटामिन D की जाँच कराएँ और इनकी कमी पूरी करें। रात को देर तक जागने से बचें और प्रोटीन थोड़ा ज़्यादा लें।

थायराइड में ज़रूरी हैं लाइफस्टाइल से जुड़े ये बदलाव – Thyroid mein zaruri hain lifestyle se jude ye badlaav

  1. रूटीन ठीक करें अक्सर देर रात सोने और देर से उठने से बॉडी का नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ जाता है, जिससे थायराइड हॉर्मोन का संतुलन गड़बड़ा जाता है।

  2. भारी और लेट डिनर से बचें - रात में भारी और लेट डिनर करने से पाचन कमजोर होता है जिससे पाचन अग्नि मंद पड़ती है और थायराइड गड़बड़ा जाता है। 

  3. लंबे समय तक खाली पेट न रहें - लंबे वक़्त तक खाली पेट रहने से वात बढ़ने लगता है, जिससे हार्मोनल इम्बैलेंस तेज हो जाता है।

  4. ज़्यादा तनाव - अधिक तनाव से स्ट्रेस कोर्टिसोल बढ़ाता है, जो थायराइड हॉर्मोन को दबा देता है और महिलाओं में ज्यादा असर करता है। इसलिए, स्ट्रेस कम करें। 

आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि थायराइड का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को थायराइड की समस्या है या थायराइड के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या आयुकर्मा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से थायराइड का आयुर्वेदिक इलाज लें। यहाँ आपको प्राकृतिक इलाज के साथ-साथ थायराइड के लिए हेल्दी डाइट चार्ट और ज़रूरी परामर्श भी दिया जाएगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें आयुकर्मा के साथ।



 

FAQs

 

  • आयुर्वेद में थायराइड को किस नाम से जाना जाता है? – Ayurved mein thyroid ko kis naam se jana jata hai? 
    आयुर्वेद में इसे गलगंड, अपचय और अग्निमांद्य से जुड़ी समस्या माना जाता है।

  • आयुर्वेद में थायराइड का इलाज कितने समय में असर दिखाता है? – Ayurved mein thyroid ka ilaj kitne samay mein asar dikhaata hai?
    आमतौर पर कुछ महीनों में सुधार दिखता है। लेकिन यह रोगी की स्थिति, उम्र और रूटीन पर भी निर्भर करता है

  • क्या योग और प्राणायाम आयुर्वेदिक इलाज का हिस्सा हैं? – Kya yog aur pranayam ayurvedic ilaj ka hissa hain?
    हाँ, योग और प्राणायाम थायराइड संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • थायराइड में पंचकर्म थेरेपी कितनी उपयोगी है? – Thyroid mein panchakarma therapy kitni upyogi hai?
    पंचकर्म शरीर से जहरीले तत्व निकालकर हार्मोन संतुलन में मदद करता है।

 

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