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अदरक और शहद - अदरक और शहद का मिश्रण बहुत ही प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है, वो भी खासकर जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं के लिए। क्योंकि अदरक में मौजूद जिंजरॉल एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व है, जो गले की सूजन को कम करता है और बंद नाक व बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है। वहीं शहद एक प्राकृतिक कफ सिरप की तरह काम करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो गले की खराश को शांत करते हैं और खांसी को कम करने में मदद करते हैं। ये मिश्रण खासकर उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जो बार-बार सर्दी-जुकाम से पीड़ित रहते हैं या जिन्हें एलर्जिक खांसी की समस्या होती है।

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लहसुन और सरसों तेल से मालिश - जुकाम और खांसी की स्थिति में लहसुन और सरसों के तेल से की गई मालिश बहुत ही प्रभावशाली आयुर्वेदिक घरेलू उपाय है। क्योंकि मालिश की वजह से शरीर को गर्मी मिलती है, उसी के साथ श्वसन तंत्र को खोलने और बलगम को ढीला करने में मदद मिलती है। अगर हम बात करें लहसुन की तो उसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। और सरसों का तेल भी अपनी गर्म प्रकृति के लिए जाना जाता है। यह मालिश के दौरान त्वचा के जरिए जल्दी अवशोषित होकर रक्तसंचार को बढ़ाता है, जिससे जुकाम और खांसी के कारण आई ठंडक और जकड़न में आराम मिलता है। इस तेल को मुख्य रूप से छाती, पीठ, गले और तलवों पर मालिश करना चाहिए।

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हल्दी वाला दूध - जुकाम और खांसी की समस्या में हल्दी वाला दूध बहुत लाभदायक होता है। ये गले की खराश को शांत करता है और गले में मौजूद सूजन को कम करता है, जिससे खांसी में आराम मिलता है। इसके अलावा, हल्दी के औषधीय गुण बलगम को पतला करते हैं, जिससे कफ आसानी से बाहर निकलता है और फेफड़ों की सफाई होती है। और सबसे खास बात ये न केवल संक्रमण से लड़ता है, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाता है, जिससे भविष्य में जुकाम और खांसी की संभावना कम हो जाती है। इसलिए इसे जुकाम खांसी दूर करने के घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

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तुलसी का काढ़ा - तुलसी को केवल एक पौधा ही नहीं बल्कि आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी और प्रभावशाली घरेलू उपचार माना जाता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी का कारण बनने वाले वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। पर अगर आप इसके अलावा इस काढ़े में अगर काली मिर्च, अदरक, दालचीनी या लौंग मिलाई जाए तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं।

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भाप लेना - भाप लेना जुकाम और खांसी के लिए सबसे सरल, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी घरेलू उपाय है, क्योंकि जब आप गर्म पानी से उठती भाप को सांस के जरिए अंदर लेते हैं, तो यह श्वसन तंत्र में जमी हुई सूखी या गाढ़ी बलगम को ढीला करती है और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद करती है। पर ध्यान रखें की भाप लेने के बाद शरीर को ठंडी हवा से बचाना आवश्यक होता है, ताकि फायदा बना रहे और दोबारा ठंड न लगे। ये इलाज सबसे आसान और प्रभावी है इसलिए इसे सर्दी खांसी का देसी इलाज भी माना जाता है।

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काली मिर्च और शहद - काली मिर्च और शहद का मिश्रण जुकाम और खांसीकी स्थिति में बहुत फायदेमंद है, काली मिर्च में तीखेपन के साथ शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गले में जमा बलगम को ढीला करने और उसे बाहर निकालने में मदद करते हैं। वहीं शहद में एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो गले को कोटिंग प्रदान करते हैं, जिससे सूखी खांसी और गले की खराश में तुरंत राहत मिलती है। और यही नहीं यह उपाय बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सुरक्षित है, पर ध्यान रहे की मात्रा नियंत्रित हो।

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मुलैठी चूर्ण - बहुत कम लोगों को इस बात का पता होगा की जुकाम और खांसी के समय में मुलैठी चूर्ण भी बहुत लाभदायक हो सकता है। क्यूंकी इसमे बहुत से गुण होते हैं जैसे एंटीऑक्सीडेंट जो इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं। इसके अलावा इसमें एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं जो सर्दी-जुकाम के संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। आप चाहें तो इस चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

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नमक के गरारे - जुकाम और खांसी की स्थिति में नमक के गरारे करना अत्यंत सरल, सुरक्षित और असरदार घरेलू उपाय है, क्योंकि गरारे से गले की सतह पर मौजूद बलगम या म्युकस ढीला होता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है और सांस लेना आसान हो जाता है। यह प्रक्रिया गले को संक्रमण से बचाती है और जलन को कम करती है। अच्छे परिणाम के लिए दिन में दो से तीन बार गरारे करने से गले की सफाई बनी रहती है और दवाइयों की ज़रूरत भी कम हो जाती है। इसलिए इसे जुकाम और खांसी के घरेलू नुस्खे में सबसे ज्यादा माना जाता है।

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त्रिकटु चूर्ण का सेवन - त्रिकटु चूर्ण तीन गर्म प्रकृति वाली औषधियों से मिलकर बनता है जैसे - सौंठ, काली मिर्च और पिपली। इसका उपयोग श्वसन तंत्र की रुकावटें दूर करने, कफ को कम करने और पाचन शक्ति को सुधारने के लिए सदियों से किया जाता रहा है। त्रिकटु शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ वात और कफ दोष को संतुलित करता है, जो जुकाम और खांसी की मुख्य वजह होते हैं। पर एक बात का ध्यान रखें की यह चूर्ण पूरी तरह प्राकृतिक है, लेकिन इसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए क्योंकि यह बहुत गर्म होता है। कुल मिलकर इसलिए इसे खांसी और जुकाम का आयुर्वेदिक इलाज माना जाता है।

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सोंठ का काढ़ा - सूंठ का मतलब सूखी अदरक होता है, जो जुकाम और खांसी के लिए अत्यंत प्रभावशाली और पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार है। इसमें प्राकृतिक एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो सर्दी-खांसी से जुड़े लक्षणों को जल्दी शांत करने में मदद करते हैं। और अगर आपने इस काढ़े में काली मिर्च, तुलसी, लौंग, दालचीनी या गुड़ मिलाया जाए, तो यह और भी असरदार बन जाता है। यही नहीं यह एक प्राकृतिक और साइड इफेक्ट रहित उपाय है, जो बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी उपयुक्त होता है।