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गुर्दा और किडनी में क्या फर्क है

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गुर्दा और किडनी में क्या फर्क है?

गुर्दा और किडनी में ख़ासकर भाषा का फर्क है। कई बार डॉक्टर “किडनी” बोलते हैं और घर के बड़े-बुजुर्ग “गुर्दा” शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इस वजह से लोग अक्सर कंफ्यूज़ हो जाते हैं और उनके दिमाग में ये सवाल उठता है कि “गुर्दा और किडनी में क्या फर्क है?” कुछ लोग, जिन्हें हिन्दी नहीं आती, वे भी जानना चाहते हैं कि ‘गुर्दा और किडनी एक ही हैं या अलग’। इस बारे में डीटेल में जानकारी नीचे दी गई है।

क्या गुर्दा और किडनी अलग-अलग हैं?

दरअसल, असल में दोनों एक ही हैं, बस भाषा बदल जाती है। भारत में अलग-अलग भाषाएँ हैं। गांव में लोग “गुर्दा” शब्द ज़्यादा बोलते हैं, जबकि शहरों में “किडनी” शब्द आम है। डॉक्टर मेडिकल टर्म इस्तेमाल करते हैं, इसलिए “Kidney” शब्द ज़्यादा सुनाई देता है। लेकिन, सच्चाई यही है कि गुर्दा और किडनी एक ही अंग के दो नाम हैं।

  • “गुर्दा” शब्द हिंदी और उर्दू में इस्तेमाल होता है।
  • “Kidney” अंग्रेज़ी शब्द है।

जिस तरह “हृदय” को English में “Heart” कहते हैं, उसी तरह “गुर्दा” को English में “Kidney” कहा जाता है। इसलिए, इन दोनों में कोई शारीरिक फर्क नहीं है।

गुर्दा और किडनी में क्या फर्क है

बॉडी में किडनी (गुर्दा) कहाँ होती है?

हमारी बॉडी में दो किडनी होती हैं –

  • एक दाईं तरफ
  • एक बाईं तरफ

ये रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ, पेट के पीछे की ओर होती हैं। इनका size राजमा जैसा होता है, इसलिए इन्हें kidney कहा गया। हर किडनी लगभग एक मुट्ठी के बराबर होती है, लेकिन इनका काम बहुत बड़ा और ज़रूरी है।

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किडनी (गुर्दा) का ख़ास काम क्या है?

किडनी (गुर्दा) के ख़ास काम इस प्रकार हैं –

  1. खून को फिल्टर करना
    किडनी खून से यूरिया, क्रिएटिनिन और दूसरी गंदगी को छानकर बाहर निकालती है।

     
  2. पेशाब बनाना
    जो गंदगी और extra पानी होता है, उसे किडनी पेशाब के रूप में बाहर निकाल देती है।

     
  3. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना
    किडनी एक खास हार्मोन बनाती है जो BP को balanced रखने में मदद करता है।

     
  4. हीमोग्लोबिन बनाने में मदद
    किडनी Erythropoietin नाम का हार्मोन बनाती है, जो खून में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है।

     
  5. पानी और मिनरल्स का बैलेंस
    सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम जैसे मिनरल्स को सही मात्रा में बनाए रखना भी किडनी का काम है।

आयुर्वेद में गुर्दे को कैसे समझाया गया है?

आयुर्वेद में “किडनी” शब्द की बजाय “वृक्क” नाम इस्तेमाल किया जाता है। वृक्क ही गुर्दा है। आयुर्वेद के अनुसार वृक्क “मूत्रवह स्रोतस” का ख़ास अंग है। इसका काम मूत्र का निर्माण और शुद्धिकरण है। यह शरीर के द्रव संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से गुर्दा खराब होने के कारण इस प्रकार हैं –

  • ज़्यादा नमक और तला-भुना खाना

  • बार-बार दर्द निवारक दवाइयाँ

  • मधुमेह

  • हाई ब्लड प्रेशर

  • लंबे वक़्त तक पेशाब रोकना

  • शरीर में पानी की कमी

क्या गुर्दा और किडनी के लक्षण अलग होते हैं?

नहीं। क्योंकि दोनों एक ही हैं, इसलिए इनके लक्षण भी एक जैसे ही होंगे। किडनी (गुर्दा) की समस्या में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं – 

  • पैरों में सूजन

  • चेहरे पर सूजन

  • पेशाब कम आना या झागदार पेशाब

  • बार-बार पेशाब आना

  • थकान

  • भूख कम लगना

  • उल्टी या मिचली

अगर ये लक्षण लंबे वक़्त तक बने रहें, तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।

किडनी (गुर्दा) की जांच कैसे होती है?

किडनी (गुर्दा) की जांच के लिए ईन tests का इस्तेमाल किया जा सकता है –

  1. सीरम क्रिएटिनिन जांच (Serum Creatinine Test) – खून में क्रिएटिनिन की मात्रा मापी जाती है।

  2. ब्लड यूरिया जांच (Blood Urea Test) – यूरिया का स्तर देखा जाता है।

  3. पेशाब की जांच (Urine Test) – पेशाब में प्रोटीन या इंफेक्शन की जांच।

  4. अल्ट्रासाउन्ड (Ultrasound) – किडनी का size और condition देखने के लिए।

अगर शुरुआती स्टेज में समस्या पकड़ ली जाए, तो इलाज आसान हो जाता है।

किडनी खराब होने पर क्या होता है?

जब किडनी अपनी फिल्टर करने की क्षमता खोने लगती है, तो इसे किडनी फेलियर या Chronic Kidney Disease (CKD) कहा जाता है। इस कन्डिशन में;

  • खून में गंदगी बढ़ जाती है

  • बॉडी में सूजन आती है

  • सांस फूल सकती है

  • Heart पर दबाव बढ़ता है

गुर्दे (किडनी) के पारंपरिक और आयुर्वेदिक इलाज की सोच

आयुर्वेद में गुर्दे (किडनी) को स्वस्थ रखने के लिए ईन प्राकृतिक उपायों का इस्तेमाल किया जाता है –

1. पुनर्नवा

पुनर्नवा को सूजन कम करने और मूत्र बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

2. गोक्षुर

गोक्षुर को पेशाब संबंधी समस्याओं में उपयोग किया जाता है।

3. वरुण छाल

यह मूत्र मार्ग को साफ रखने में मदद करती है।

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4. सही खानपान

आयुर्वेद में दवा के साथ diet से जुड़े कुछ सुझावों का पालन करना ज़रूरी होता है, जैसे – कम नमक लें, हल्का और सादा भोजन खाएँ, ताजे फल और सब्जियाँ खाएँ, पर्याप्त पानी (डॉक्टर की सलाह अनुसार) पियें।

मॉडर्न मेडिकल ट्रीटमेंट क्या कहता है?

किडनी के आधुनिक इलाज में;

  • डायबिटीज और BP को कंट्रोल में रखना सबसे ज़रूरी है।

  • दवाइयाँ रेगुलर लेनी होती हैं।

  • किडनी रोगी को डाइट चार्ट फॉलो करना चाहिए।

  • ज़्यादा प्रोटीन से बचाव करना चाहिए (डॉक्टर की सलाह से)।

  • गंभीर कन्डिशन में Dialysis, Kidney Transplant आदि options भी अपनाए जाते हैं जो काफी जटिल होते हैं; जहाँ तक हो सके इनसे बचना चाहिए।  

     

किडनी को स्वस्थ रखने के आसान उपाय

  1. रोज सही मात्रा में पानी पिएं (डॉक्टर की सलाह अनुसार)

  2. नमक कम खाएं

  3. BP और शुगर कंट्रोल रखें

  4. Painkillers का ज़्यादा उपयोग न करें

  5. रेगुलर वॉक या हल्का व्यायाम करें

  6. साल में एक बार किडनी टेस्ट करवाएं

बच्चों और युवाओं में किडनी की समस्या

पहले किडनी की बीमारी बुज़ुर्गों में ज़्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में भी किडनी की समस्या बढ़ रही है, जिसके पीछे ये आम कारण हैं –

  • कम उम्र में डायबिटीज

  • फास्ट फूड

  • जंक फूड

  • कम पानी पीना

  • जिम सप्लीमेंट्स का गलत इस्तेमाल

महिलाओं में किडनी समस्या

महिलाओं में बार-बार पेशाब का इंफेक्शन (UTI) आम है। अगर इसे ignore किया जाए, तो यह किडनी तक पहुंच सकता है। इसलिए पानी ज़्यादा पिएं, साफ-सफाई रखें, पेशाब न रोकें और लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज करवाएं। आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि ‘गुर्दा और किडनी में क्या फर्क है?’ लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी (गुर्दा) से जुड़ी कोई भी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या आयुकर्मा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी (गुर्दा) रोग का आयुर्वेदिक इलाज लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें आयुकर्मा के साथ।


 

FAQs
 

  • क्या एक किडनी से जीवन संभव है?
    हाँ। एक स्वस्थ किडनी अकेले ही पूरे बॉडी का काम संभाल सकती है।

  • किडनी के आयुर्वेदिक और आधुनिक इलाज में क्या समानता है? 
    दोनों ही मानते हैं कि गलत खान-पान और जीवनशैली से किडनी पर बुरा असर पड़ता है।

  • गुर्दा और किडनी में क्या अंतर होता है?
    “गुर्दा” शब्द हिंदी और उर्दू में इस्तेमाल होता है जबकि, ‘किडनी’ अंग्रेजी भाषा का शब्द है।

  • क्या किडनी की बीमारी ठीक हो सकती है?
    शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन, यह बीमारी की स्टेज पर भी निर्भर करता है।

Dr Puneet Dhawan
Ayurvedic Expert

Dr. Puneet Dhawan – Ayurvedic Expert

Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues. With a strong academic background in Ayurveda (BAMS) and years of clinical experience, the blend of Ayurvedic wisdom with practical lifestyle guidance in his treatment approach has helped thousands overcome their health issues.

His USP is not just personalized herbal treatments, but meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms. His friendly nature, clear explanations, and commitment to promoting safe, holistic healing through Ayurveda stand out in the PR dominated world.

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