बदलते लाइफस्टाइल और खराब खान-पान के चलते किडनी में स्टोन होना आम बात है, लेकिन इसके कारण बहुत ही तेज दर्द सहन करना पड़ता है। गुर्दे में पथरी होने की वजह से इंफेक्शन, यूरेटर में रुकावट, खून बहने आदि की समस्या भी झेलनी पड़ सकती हैं। लेकिन आपको बता दें कि किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा की मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
आज भारत में आधे से ज्यादा जनसंख्या किडनी स्टोन की बीमारी से जूझ रही है। ऐसे में वे किडनी स्टोन की दवा एलोपैथी से लेना पसंद करते हैं, जिससे केवल कुछ ही समय के लिए आराम मिलता है। इसलिए आज हम आपको गुर्दे की पथरी की देसी दवा बताने जा रहे हैं, जिससे आपको हमेशा के लिए इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
किडनी स्टोन के लक्षण
किडनी में कुछ स्टोन छोटे होते हैं, तो कुछ पत्थर की तरह बड़े भी हो सकते हैं। छोटी पथरी का जल्दी पता नहीं चल पाता, लेकिन पथरी बड़ी हो, तो जल्दी पता चल सकता है। वैसे तो किडनी पथरी की दवा से इससे निजात पाया जा सकता है, लेकिन इसके कुछ लक्षणों के बारे में जान लेते हैं –
- कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द
- यूरिन में ब्लड आना
- बुखार होना
- यूरिन से बदबू आना
- उल्टी महसूस होना
किडनी स्टोन के कारण
किडनी में स्टोन होने का मुख्य कारण बीज वाली चीजें माना जाता है, लेकिन इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं पर बता दें कि गुर्दा की पथरी की दवा करके आप इस प्रॉब्लम से मुक्ति पा सकते हैं। लेकिन चलिए पहले किडनी स्टोन के कारणों के बारे में जान लेते हैं –
- वजन कम होना या बढ़ना
- कम पानी पीना
- एक्सरसाइज करना
- मोटापा
- ज्यादा नमक या चीनी खाना
चिकित्सक सलाह के लिए फॉर्म भरें
किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा
किडनी में स्टोन होने से असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। ऐसे में क्लियर स्टोन पथरी की दवा करके आप इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं। तो अगर आपके मन में भी यही सवाल है कि हमें भी पथरी की देसी दवा बताओ, तो चलिए यहां जान लें –
1. तुलसी के पत्ते

तुलसी के पत्तों में एंटी-ऑक्सिडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसका सेवन करने से किडनी से स्टोन निकालने में मदद मिल सकती है। ये किडनी की हेल्थ को सही रखने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में तुलसी के पत्तों को किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा माना जा सकता है।
2. कुल्थी दाल

कुल्थी दाल को हॉर्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है। इसे एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाना जाता है। इसका सेवन करने से किडनी से स्टोन को दूर करने में मदद मिल सकती है। इसमें यूरिन की मात्रा को बढ़ाने और किडनी स्टोन को गलाने के गुण होते हैं। कुल्थी की दाल को किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा के रूप में जाना जाता है।
3. शिलाजीत

शिलाजीत को किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा कहा जा सकता है। ये मिनरल से भरपूर एक ताकतवर जड़ी-बूटी है। ये किडनी हेल्थ को बेहतर बनाने के साथ-साथ डिटॉक्सिफिकेशन में भी मदद करती है। इसे किडनी में मौजूद स्टोन को गलाने के लिए जाना जाता है।
4. गोक्षुरा

गोक्षुरा को किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा माना जाता है। इसका सेवन करने से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में, सूजन को कम करने और किडनी हेल्थ को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
अभी फॉर्म भरें और विशेषज्ञ से परामर्श करें
5. पुनर्नवा

पुनर्नवा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। इसमें डायूरेटिक गुण होते हैं, जो यूरिन प्रोडक्शन को बढ़ाता है और किडनी से स्टोन निकालने में मदद मिल सकती है। इसे किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा माना जा सकता है।
6. पाषाणभेद का पौधा

पाषाणभेद का पौधा आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में बहुत इस्तेमाल किया जाता है। इसे पत्थरचट्टा के नाम से जाना जाता है। पाषाणभेद के पौधे को किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा माना जाता है।
7. नारियल पानी

नारियल पानी में किडनी स्टोन को घोलने के गुण मौजूद होते हैं। इसका सेवन करने से यूरिन के द्वारा स्टोन निकालने में मदद मिल सकती है। नारियल पानी को किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा माना जाता है।
तो जैसा कि आपने जाना कि किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक दवा से किस तरह से इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन इसका सेवन करने से पहले आप एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर कर लें।
अगर आपको भी किडनी में स्टोन या उससे जुड़ी किसी तरह की समस्या हो रही है, तो आप अपना इलाज कर्मा आयुर्वेदा में आकर करवा सकते हैं। बता दें कि यहां सन् 1937 से किडनी से जुड़ी बीमारियों का आयुर्वेद के माध्यम से इलाज होता आ रहा है। अब इसे डॉ. पुनीत धवन संभाल रहे हैं। कर्मा आयुर्वेदा की खास बात ये है कि यहां बिना डायलिसिस और ट्रांसप्लांट के आयुर्वेद के जरिए किडनी फेलियर का इलाज किया जाता है।
Dr. Puneet Dhawan
Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues.
His USP is meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms.