खूनी बवासीर का इलाज और परहेज
खूनी बवासीर, जिसे रक्तस्रावी बवासीर भी कहते हैं, ये आज कल के समय में बहुत सामान्य लेकिन पीड़ादायक रोग है, जिसमें गुदा और मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है, जिस वजह से मल त्याग करते समय खून आने लगता है। यह समस्या मुख्य रूप से उन लोगों में देखने को मिलती है जिनको लंबे समय से कब्ज की समस्या रही हो इसके अतिरिक्त इसके और भी कारण है जिसके विषय में हम आगे बात करेंगे। आज इस आर्टिकल में हम बात करेंगे खूनी बवासीर का इलाज और परहेज के बारे में साथ ही इसके लक्षणों और कारणों पर भी विचार करेंगे।
खूनी बवासीर के लक्षण
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गुदा के पास सूजन या मस्से - गुदा क्षेत्र में सूजे या फुले हुए मस्से या गांठें महसूस होना।
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मलत्याग में कठिनाई - मल त्याग करते समय ज्यादा जोर लगाना या रुकावट महसूस होना।
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गुदा क्षेत्र में खुजली - गुदा के आसपास लगातार खुजली या जलन होना।
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मल त्याग के बाद अधूरापन महसूस होना - मल करने के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न लगना।
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मलत्याग के समय ताजे खून का आना - शौच के दौरान या बाद में ताजे लाल खून का निकलना।
खूनी बवासीर के कारण
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ज्यादा देर तक शौचालय में बैठना - ज्यादा समय तक बैठे रहने से गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है।
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लंबे समय तक कब्ज रहना - पुरानी या बार-बार कब्ज बवासीर का प्रमुख कारण बनती है।
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कम पानी पीना - शरीर में पानी की कमी से भी मल सख्त बनता है जिससे बवासीर होती है।
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भारी वजन उठाना - बार-बार भारी सामान उठाने से पेट और गुदा की नसों पर ज़ोर पड़ता है।
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कब्ज और दस्त - लगातार कब्ज या दस्त होने से गुदा क्षेत्र में तनाव उत्पन्न होता है।
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मोटापा - शरीर की एक्स्ट्रा चर्बी नसों पर दबाव बनाकर बवासीर की संभावना बढ़ाती है।
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बैठे रहने की आदत - लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है और नसों में सूजन आ सकती है।
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ज्यादा तैलीय, मसालेदार और जंक फूड खाना - ऐसे सभी भोजन पाचन खराब करता है और कब्ज को बढ़ाता है।
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अनुवांशिकता - परिवार में बवासीर का इतिहास होने पर इसकी संभावना अधिक होती है।
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गर्भावस्था - गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का दबाव नसों पर पड़ता है जिससे बवासीर हो सकती है।
खूनी बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज
- त्रिफला - त्रिफला एक प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है जो तीन फलों से बनता है जैसे आंवला, हरड़ और बहेड़ा। उए कब्ज और पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है, जिस वजह से इसे एक प्रभावी और प्राकृतिक उपचार माना जाता है। खूनी बवासीर में त्रिफला सबसे पहले मल को नरम करने में मदद करता है, जिससे मल त्याग करते समय जोर नहीं लगाना पड़ता और गुदा की नसों पर दबाव नहीं पड़ता। इससे खून आना कम होता है और पुराने मस्सों को भी धीरे-धीरे ठीक करने में सहायता मिलती है। इसलिए खूनी बवासीर में जड़ से लाभ देने वाला त्रिफला एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है।

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अर्जुन - अर्जुन एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है, जो विशेष रूप से हृदय रोगों के लिए जानी जाती है, लेकिन खूनी बवासीर में भी यह बहुत लाभकारी सिद्ध होती है। अगर हम बात करें खूनी बवासीर की तो इसमें सबसे बड़ी समस्या होती है, मलत्याग के समय ताजे खून का आना और गुदा क्षेत्र में जलन या सूजन। अर्जुन इन दोनों ही लक्षणों पर प्रभावी तरीके से काम करता है। इसकी छाल में मौजूद कसैले गुण रक्तस्राव को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साथ ही यह आँतों की गति को सामान्य करता है और मल को सामान्य रूप से बाहर निकलने में मदद करता है, जिससे मलत्याग के समय जोर नहीं लगाना पड़ता और गुदा पर दबाव नहीं बनता।

- नागकेशर - नागकेशर आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधीय जड़ी-बूटी है, जिसे विशेष रूप से रक्त से संबंधित बीमारियों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसलिए खूनी बवासीर में नागकेशर का उपयोग अत्यंत लाभकारी माना गया है। साथ ही नागकेशर में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो गुदा क्षेत्र में होने वाली सूजन, जलन और संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं। यह ना सिर्फ खून को रोकता है, बल्कि सूजे हुए मस्सों को भी छोटा करता है और उन्हें सूखने में मदद करता है।

खूनी बवासीर का घरेलू इलाज
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फाइबर युक्त आहार लें
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पानी अधिक पिएं
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बैठे रहने से बचें और हल्की एक्सरसाइज़ करें
- फाइबर युक्त आहार लें - अगर आपके मन में भी ये सवाल है की खूनी बवासीर में क्या खाना चाहिए तो उसका उत्तर है फाइबर युक्त आहार लें, और मुख्य रूप से फाइबर के दो प्रकार का होता है — घुलनशील और अघुलनशील। घुलनशील फाइबर शरीर में पानी सोखकर जेल जैसा रूप ले लेता है, जिससे मल नरम होता है। अघुलनशील फाइबर आंतों को साफ रखने और मल को तेजी से बाहर निकालने में मदद करता है। जब मल त्याग सरल और सहज होता है, तो गुदा क्षेत्र पर दबाव नहीं पड़ता, और खूनी बवासीर में खून आना धीरे-धीरे कम होने लगता है।

- पानी अधिक पिएं - खूनी बवासीर में अधिक पानी पीना बहुत ही आसान और प्रभावी घरेलू उपाय है, जो इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकता है, पानी शरीर के भीतर मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और आंतों को हाइड्रेट रखता है। पानी शरीर में रक्तसंचार को बेहतर करता है, जिससे गुदा क्षेत्र की सूजन धीरे-धीरे कम होने लगती है। खूनी बवासीर में खून का लगातार बहना शरीर को निर्जलित कर सकता है, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर आ सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से यह कमी नहीं होती और शरीर ऊर्जावान बना रहता है। इसलिए अगर आपके मन में ये सवाल है की बवासीर में खून आना कैसे रोके तो पानी इसका सबसे आसान उत्तर है पानी।

- बैठे रहने से बचें और हल्की एक्सरसाइज़ करें - खूनी बवासीर में लंबे समय तक बैठे रहने से बचना और हल्की एक्सरसाइज़ करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह दोनों बातें सीधे तौर पर रक्त प्रवाह, पाचन, और गुदा की नसों पर दबाव से जुड़ी होती हैं। अगर व्यक्ति हलचल करता है, चलने-फिरने की आदत डालता है और थोड़ी-बहुत एक्सरसाइज़ करता है, तो यह रक्त प्रवाह को सामान्य बनाए रखता है और सूजन को कम करने में मदद करता है। और बैठे रहने की आदत रक्त संचार को धीमा कर देती है, जिससे गुदा के आसपास की सूजी हुई नसों में खून जमा होने लगता है।
आज के इस आर्टिकल में हमने खूनी बवासीर का इलाज और परहेज, के बारे में, बात करी और आपने जाना की कैसे कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार इस समस्या में आपके काम आ सकते हैं, लेकिन आप सिर्फ इन सुझावों पर निर्भर ना रहें समस्या अगर ज्यादा गंभीर है तो डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेद अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें अयुकर्मा के साथ।
FAQ
- बवासीर से खून निकलने लगे तो क्या करें?
बवासीर से खून निकलने लगे तो सबसे पहले ज्यादा जोर लगाना बंद करें, ठंडे पानी से गुदा क्षेत्र साफ करें, त्रिफला या इसबगोल लें ताकि मल नरम रहे, और तुरंत गुनगुने पानी में सिट्ज़ बाथ लें। अगर खून अधिक आए तो आयुर्वेदिक औषधियाँ जैसे नागकेशर, अर्जुन चूर्ण लें और डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
- खूनी बवासीर क्या खाने से ठीक होता है?
खूनी बवासीर में फाइबर युक्त आहार जैसे पपीता, अनार, हरी सब्जियाँ, दलिया, चोकर वाला आटा और दालें खाना फायदेमंद होता है। साथ ही खूब पानी पिएं, छाछ लें, त्रिफला चूर्ण रात में लें और तैलीय-मसालेदार भोजन से परहेज करें।
- बवासीर में खाली पेट क्या पीना चाहिए?
बवासीर में खाली पेट गुनगुना पानी या त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी में मिलाकर पीना चाहिए। चाहें तो एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर भी ले सकते हैं, इससे पाचन सुधरता है और कब्ज नहीं होता।
Dr. Puneet Dhawan
Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues.
His USP is meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms.