
एक्जिमा की बेस्ट क्रीम – Eczema Ki Best Cream
क्या होती है एक्जिमा की बीमारी? – Kya hoti hai eczema ki bimari
यह त्वचा से जुड़ी वो बीमारी है जो आमतौर पर लंबे समय तक चलती है। इसे एटोपिक डर्मेटाइटिस भी कहा जाता है जिसमें स्किन ड्राय, लाल, खुजलीदार और सूजन वाली हो जाती है। अगर इसे ठीक न किया जाए तो स्किन हमेशा के लिए मोटी, खुरदरी, काली पड़ सकती है और रोगी को मेंटल स्ट्रेस और आत्म-विश्वास की कमी भी रहती है। लेकिन, अच्छी बात ये है कि एक्जिमा को कुछ प्राकृतिक तरीकों; तेल या लेप आदि से भी ठीक किया जा सकता है, ख़ासकर जब रोग शुरुआती स्टेज पर हो। इसलिए, एक्जिमा की बेस्ट क्रीम के बारे में जानकार जल्द ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए ताकि यह रोग गंभीर न हो। आप चाहें तो एक्जिमा का आयुर्वेदिक उपचार आयुकर्मा अस्पताल से भी ले सकते हैं लेकिन पहले एक्जिमा के लक्षण और कारण ठीक से जान लें जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।

एक्जिमा किन कारणों से होता है? – Eczema kin kaarano se hota hai?
नीचे दिए गए ईन कारणों से आमतौर पर एक्जिमा होता है –
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ज़्यादा ऐक्टिव इम्यून सिस्टम; बाहर से आने वाले तत्त्वों के प्रति इम्यून सिस्टम ज़्यादा ऐक्टिव होने से सूजन पैदा करता है
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जनेटिक कारण; अगर परिवार में किसी को एक्जिमा, अस्थमा या हे फीवर पहले हुआ हो
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धूल के कण, पराग और पालतू जानवरों की रूसी से होने वाली ऐलर्जी
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फिलाग्रिन प्रोटीन की कमी; जिससे स्किन की बाहरी परत कमज़ोर हो जाती है, नमी कम होती है और बाहरी तत्व आसानी से स्किन को नुकसान पहुँचा सकते हैं
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स्ट्रेस जो एक्जिमा को ट्रिगर कर सकता है
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किसी साबुन, डिटर्जेंट या कॉस्मेटिक से निकालने वाले केमिकल्स का अटैक
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स्किन पर बैक्टीरिया या वायरस का इन्फेक्शन
एक्जिमा की पहचान कैसे करें? – Eczema ki pahchaan kaise karein?
ईन लक्षणों से एक्जिमा की पहचान की जा सकती है –
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तेज़ खुजली होना
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ड्राय, पपड़ी वाली स्किन
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स्किन पर चकत्ते (धब्बे) दिखना जो लाल, भूरे या बैंगनी रंग के हो सकते हैं
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असर वाली जगह पर सूजन
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हल्के, छोटे दाने या छाले
एक्जिमा की बेस्ट क्रीम – Eczema ki best cream
आम तौर पर बेस्ट इलाज वो होता है जो प्राकृतिक और सुरक्षित हो, जिसके साइड ईफेक्टस् न हो। ऐसा इलाज आमतौर पर आयुर्वेद में मौजूद होता है। इसलिए, आप अपने अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेकर आयुर्वेदिक क्रीम से एक्जिमा का उपचार कर सकते हैं जिसे बनाने में ईन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है –
1. गंधक - यह कृमिनाशक और त्वचा शोधक है। यह खुजली और पपड़ी को कम करता है, फंगल इंफेक्शन में बहुत असरदार होता है और पुराने, क्रॉनिक एक्जिमा में उपयोगी है।
2. मंजिष्ठा - यह खून के दोषों का नाश करता है। इससे स्किन की लालिमा और सूजन घटती है, स्किन टॉक्सिन्स निकालने में मदद मिलती है। साथ ही पिग्मेंटेशन और दाग कम होते हैं।

3. नीम - यह कफ-पित्त शामक है और रक्तशोधक है। यह खुजली और जलन कम करता है, बैक्टीरियल व फंगल इंफेक्शन से बचाव करता है। पुराने एक्जिमा के उपचार में नीम बहुत फायदेमंद है।
4. हल्दी - यह सूजनरोधी और एंटीसेप्टिक है। यह एक्जिमा के घाव जल्दी भरती है, जलन और दर्द में राहत देती है और त्वचा को नेचुरल सुरक्षा देती है।

5. यष्टिमधु - यह पित्तशामक, सूजनरोधी है जो लालिमा और खुजली कम करती है, त्वचा को मुलायम बनाती है और स्किन एलर्जी में मदद करती है।
6. करंज - यह कफनाशक और एंटीफंगल है जिससे खुजली और सूजन कम होती है, स्किन एलर्जी में आराम मिलता है, सूखी और मोटी स्किन नरम बनती है।
7. एलोवेरा - यह शीतल और त्वचा पोषक है जो जलन और सूखापन शांत करता है, स्किन को नमी देता है। बच्चों के एक्जिमा में यह सुरक्षित है।

8. लोध्र - इसमें सूजनरोधी गुण होते हैं और यह कसैला है। इससे रिसाव में फायदा मिलता है, स्किन टाइट होती है और लालिमा कम होती है।
9. चंदन - यह शीतल होता है जिससे जलन और गर्मी शांत होती है। पित्त से बढ़ने वाले एक्जिमा में यह बहुत फायदा करता है।
10. तुलसी - यह जीवाणुनाशक है। तुलसी इंफेक्शन से बचाव करती है, खुजली और सूजन कम करती है। साथ ही स्किन की इम्यूनिटी बढ़ाती है।
एक्जिमा में करें ईन चीज़ों का परहेज़ – Eczema mein karein een cheezon ka parhez
1. गलत खान-पान - पित्त और कफ बढ़ाने वाली चीज़ें न खाएँ जैसे – तला-भुना, फास्ट फूड, बहुत मसालेदार, चटपटा भोजन, ज्यादा मिर्च, गरम मसाले, पैकेट वाला, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, पिज़्ज़ा, बर्गर, बासी और फ्रिज का पुराना खाना।
2. नहाने से जुड़ी गलतियाँ - ज़्यादा गरम पानी से नहाना, दिन में बार-बार साबुन लगाना, ज़ोर से रगड़ना (लोफा/तौलिया) आदि से स्किन की नमी खत्म होती है और एक्जिमा बढ़ता है।
3. मीठा और शुगर - ज़्यादा मिठाई, केक, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और रिफाइंड शुगर से इंफ्लेमेशन और खुजली बढ़ती है।

4. गरम तासीर वाली चीज़ें - अदरक, लहसुन लिमिट में लें। अंडा, रेड मीट, शराब न लें – ये चीज़ें पित्त दोष बढ़ाकर जलन और लालिमा बढ़ाती हैं।
5. दूध और खट्टे का गलत संयोजन - दूध के साथ नमक, दूध के साथ खट्टे फल, रात में दही खाना, दही के साथ मछली/मांस आदि विरुद्ध आहार माना जाता है, जो एक्जिमा को बढ़ाता है।
6. स्किन पर इन चीज़ों का प्रयोग न करें - बिना डॉक्टर को पूछे स्टेरॉइड क्रीम का इस्तेमाल न करें। साथ ही तेज़ खुशबू वाले साबुन, केमिकल वाले बॉडी वॉश, परफ्यूम, डियो न लगाएँ। सीधे स्किन पर एल्कोहल बेस्ड प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें।
7. तनाव और नींद की कमी - ज्यादा तनाव, देर रात जागना, गलत दिनचर्या आदि से कोर्टिसोल बढ़ता है, जिससे खुजली और सूजन बढ़ती है।
8. कपड़ों में परहेज - टाइट कपड़े, सिंथेटिक फैब्रिक, पसीना रोकने वाले कपड़े न पहनें। इसके बजाय सूती, ढीले और सांस लेने वाले कपड़े पहनें।
9. मौसम से जुड़ी सावधानी - बहुत ठंडी हवा, ज्यादा धूप, पसीना लंबे समय तक लगा रहना, मौसम का असर एक्जिमा को भड़का सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको एक्जिमा की बेस्ट क्रीम के बारे में बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को एक्जिमा की समस्या है या एक्जिमा के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या आयुकर्मा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से एक्जिमा का आयुर्वेदिक इलाज लें। यहाँ आपको प्राकृतिक इलाज के साथ-साथ एक्जिमा के लिए हेल्दी डाइट चार्ट और ज़रूरी परामर्श भी दिया जाएगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें आयुकर्मा के साथ।
FAQs
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एक्जिमा में खुजली रोकने की सबसे अच्छी क्रीम कौन-सी है? – Eczema mein khujli rokne ki sabse acchi cream kaun-si hai?
ओटमील, एलोवेरा या नीम आधारित क्रीम खुजली के लिए सबसे अच्छी होती है। -
एक्जिमा के लिए मॉइस्चराइजिंग क्रीम क्यों ज़रूरी है? – Eczema ke liye moisturizing cream kyo zaruri hai?
एक्जिमा में स्किन बहुत सूखी हो जाती है, इसलिए मॉइस्चराइजिंग क्रीम स्किन बैरियर सुधारती है। -
क्या एक्जिमा की क्रीम रोज़ लगानी चाहिए? – Kya eczema ki cream roz lagaani chahiye?
हाँ, दिन में 2 से 3 बार रेगुलर क्रीम लगाना ज़रूरी होता है। -
क्या एक ही क्रीम से एक्जिमा पूरी तरह ठीक हो सकता है? – Kya ek hi cream se eczema poori tarah theek ho sakta hai?
नहीं, क्रीम सिर्फ़ लक्षण कम करती है; डाइट और लाइफस्टाइल सुधार भी ज़रूरी है।
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