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चंद्रप्रभा वटी की तासीर कैसी होती है

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चंद्रप्रभा वटी की तासीर कैसी होती है? 

 आयुर्वेद में ऐसी कई औषधियाँ बताई गई हैं जो एक ही समय में शरीर की कई प्रणालियों पर काम करती हैं। चंद्रप्रभा वटी उन्हीं में से एक मानी जाती है। खासतौर पर पेशाब, किडनी, कमजोरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं में इसका नाम अक्सर लिया जाता है। लेकिन लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि चंद्रप्रभा वटी की तासीर आखिर ठंडी होती है या गर्म? आइए इसे विस्तार से समझते हैं। 

चंद्रप्रभा वटी क्या है और आयुर्वेद में इसका उपयोग क्यों किया जाता है?

चंद्रप्रभा वटी एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है।
यह कई जड़ी-बूटियों और खनिज तत्वों से मिलकर बनी होती है।

आयुर्वेद के अनुसार:

  • यह मूत्रवह स्रोतस को साफ करती है

  • शरीर में जमी हुई सूजन को कम करने में मदद करती है

  • कमजोरी और थकान को दूर करने में सहायक मानी जाती है

और इसी वजह से इसे किडनी, पेशाब और मेटाबॉलिक समस्याओं में उपयोग किया जाता है।

चंद्रप्रभा

चंद्रप्रभा वटी की तासीर ठंडी होती है या गर्म?

चंद्रप्रभा वटी की तासीर को लेकर अक्सर भ्रम रहता है।
असल में इसकी तासीर न पूरी तरह ठंडी होती है और न ही ज्यादा गर्म।

आयुर्वेदिक दृष्टि से:

  • इसमें कुछ घटक शीतल यानी ठंडे प्रभाव वाले होते हैं

  • कुछ घटक उष्ण प्रभाव वाले होते हैं

इसी संतुलन की वजह से:

  • यह शरीर में पित्त और कफ दोनों को संतुलित करने का काम करती है

  • सामान्य प्रकृति वाले लोग इसे आसानी से सहन कर पाते हैं

चंद्रप्रभा वटी किन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है?

यह औषधि विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है:

  • जिन्हें बार-बार पेशाब आने की समस्या रहती है

  • पेशाब में जलन या दर्द महसूस होता है

  • शरीर में सूजन बनी रहती है

  • सामान्य कमजोरी और थकावट बनी रहती है

इसके अलावा जिनका मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है, उनमें भी इसका उपयोग किया जाता है।

क्या चंद्रप्रभा वटी पेशाब से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी है?

हाँ, चंद्रप्रभा वटी का सबसे प्रमुख उपयोग मूत्र रोगों में माना जाता है।

यह इन समस्याओं में सहायक हो सकती है:

  • पेशाब में जलन

  • पेशाब का रंग गाढ़ा होना

  • पेशाब रुक-रुक कर आना

  • मूत्र मार्ग में असहजता

आयुर्वेद के अनुसार यह मूत्र मार्ग को साफ और सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है।

किडनी से संबंधित रोगों में चंद्रप्रभा वटी कैसे काम करती है?

किडनी से जुड़ी समस्याओं में चंद्रप्रभा वटी को सहायक औषधि माना जाता है।

यह -

  • सूजन कम करने में मदद करती है

  • शरीर से टॉक्सिन्स निकालने की प्रक्रिया को सपोर्ट करती है

  • मूत्र प्रवाह को बेहतर बनाती है

हालांकि गंभीर किडनी रोग या डायलिसिस के मरीजों को इसे बिना वैद्य की सलाह के नहीं लेना चाहिए।

क्या चंद्रप्रभा वटी डायबिटीज में ली जा सकती है?

डायबिटीज के मरीजों में चंद्रप्रभा वटी का उपयोग कभी-कभी किया जाता है।

इसका कारण यह है कि -

  • यह मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद कर सकती है

  • कमजोरी और थकान को कम कर सकती है

लेकिन यह शुगर की मुख्य दवा का विकल्प नहीं है और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

चंद्रप्रभा वटी पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी है?

हाँ, चंद्रप्रभा वटी पुरुष और महिला दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है।

पुरुषों में:

  • कमजोरी
  • पेशाब से जुड़ी समस्याएँ

महिलाओं में:

  • यूरिन इंफेक्शन
  • बार-बार पेशाब आना
  • सामान्य थकान

इन स्थितियों में इसका उपयोग किया जाता है।

चंद्रप्रभा वटी का सेवन कितने समय तक सुरक्षित माना जाता है?

आमतौर पर चंद्रप्रभा वटी का सेवन इस समय पर करना चाहिए जैसे:

  • 4 से 8 सप्ताह तक का सेवन सुरक्षित माना जाता है

लंबे समय तक सेवन करने से पहले:

  • आयुर्वेदिक वैद्य से सलाह लेना जरूरी होता है

चंद्रप्रभा वटी के संभावित साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं?

सही मात्रा में चंद्रप्रभा वटी लेने पर इसके साइड इफेक्ट बहुत कम होते हैं।

लेकिन:

  • ज्यादा मात्रा लेने पर शरीर में गर्मी

  • पेट में जलन

  • बेचैनी

जैसी समस्याएँ हो सकती हैं, खासकर जिन लोगों की प्रकृति पित्त की होती है।

किन परिस्थितियों में चंद्रप्रभा वटी का सेवन नहीं करना चाहिए?

इन स्थितियों में चंद्रप्रभा वटी के सेवन में सावधानी जरूरी है:

  • गर्भावस्था

  • बहुत अधिक पित्त की समस्या

  • गंभीर किडनी फेल्योर

  • किसी घटक से एलर्जी

चंद्रप्रभा वटी का सही सेवन तरीका क्या है?

आमतौर पर इसे गुनगुने पानी के साथया दूध के साथ लिया जाता है। सही मात्रा व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है।

क्या इसे अन्य आयुर्वेदिक दवाओं के साथ लिया जा सकता है?

हाँ, चंद्रप्रभा वटी को अन्य आयुर्वेदिक दवाओं के साथ लिया जा सकता है, लेकिन कुछ चीज़ों का खास ध्यान रखा जाता है जैसे दवाओं का संयोजन वैद्य द्वारा तय किया जाना चाहिए ताकि शरीर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। 

चंद्रप्रभा वटी और गोक्षुरादि गुग्गुल में क्या अंतर है?

चंद्रप्रभा वटी:

  • बहुउद्देशीय औषधि है

  • कई सिस्टम पर काम करती है

गोक्षुरादि गुग्गुल:

  • मुख्य रूप से मूत्र और सूजन पर केंद्रित होती है

क्या चंद्रप्रभा वटी लंबे समय तक लेने से शरीर की तासीर बदल सकती है?

अगर बिना सलाह लंबे समय तक ली जाए तो:

  • शरीर में गर्मी बढ़ सकती है

  • पित्त असंतुलन हो सकता है

इसलिए सीमित समय और सही मार्गदर्शन जरूरी है।

आज इस आर्टिकल में हमने चंद्रप्रभा वटी की तासीर कैसी होती है इस विषय में जाना साथ ही  चंद्रप्रभा वटी से जुड़े कुछ प्रश्नों पर भी बात करी जिससे आप इस आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के बारे में जान पाएं। पर आप ध्यान रखें कि किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। और ऐसे ही ब्लॉग्स और आर्टिकल के लिए जुड़े रहें आयु कर्मा के साथ। यही नहीं ज्यादा जानकारी और डॉक्टर की सलाह के लिए आज ही फोन करें +91 9971119811





 

FAQ

 

  • क्या चंद्रप्रभा वटी गर्म होती है? 
    नहीं, चंद्रप्रभा वटी को पूरी तरह गर्म तासीर की दवा नहीं माना जाता। इसकी तासीर संतुलित होती है, क्योंकि इसमें ठंडे और हल्के गर्म दोनों प्रकार के घटक होते हैं, जो शरीर में पित्त को बढ़ाए बिना संतुलन बनाकर काम करते हैं।

  • चंद्रप्रभा वटी लेने का सबसे अच्छा समय कब है? 
    चंद्रप्रभा वटी लेने का सबसे अच्छा समय आमतौर पर सुबह और शाम भोजन के बाद माना जाता है, ताकि दवा आसानी से पच सके और शरीर पर संतुलित रूप से अपना प्रभाव दिखा सके।

  • चंद्रप्रभा के दुष्प्रभाव क्या हैं? 
    सही मात्रा में लेने पर चंद्रप्रभा वटी के दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं, लेकिन अधिक मात्रा या लंबे समय तक बिना सलाह लेने पर पेट में जलन, शरीर में गर्मी, बेचैनी या पित्त बढ़ने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

  • आयुर्वेदिक में सबसे ताकतवर दवा कौन सी है?
    आयुर्वेद में कोई एक दवा सबसे ताकतवर नहीं मानी जाती, क्योंकि दवा की ताकत रोग और व्यक्ति की प्रकृति पर निर्भर करती है, लेकिन सामान्य रूप से अश्वगंधा, शिलाजीत और च्यवनप्राश शक्तिशाली दवाओं में गिनी जाती हैं।

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