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किडनी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज

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किडनी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज

किडनी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज 

किडनी हमारे शरीर का बहुत ही जरूरी अंग है, और कभी कभी किडनी में गांठ भी बन जाते हैं, जिसे सुनते ही ज़्यादातर लोग डर भी जाते हैं। की कहीं ये कभी किसी गंभीर बीमारी या कैंसर जैसी समस्या का संकेत तो नहीं? लेकिन ये जानना बहुत जरूरी है की हर गांठ खतरनाक नहीं होती। बहुत बार ये शरीर के अंदर हुए असंतुलन या टॉक्सिन्स के जमा होने की वजह से भी हो सकते हैं। बहुत से लोग इस समस्या के लिए तुरंत ही आधुनिक दवाइयों का सहारा लेते हैं पर आयुर्वेद इस समस्या को सिर्फ लक्षणों से नहीं, बल्कि जड़ से ठीक करने पर ज़ोर देता है यानी शरीर को डिटॉक्स करना, दोषों का संतुलन बहाल करना और किडनी की प्राकृतिक कार्यक्षमता को फिर से ऐक्टिव करना। आज इस आर्टिकल में हम किडनी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बात करेंगे साथ ही इसके लक्षणों और कारणों पर भी ध्यान देंगे। जिससे कौन-कौन सी जड़ी-बूटियाँ व घरेलू उपाय इसे धीरे-धीरे गलाने या नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के, पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से।

किडनी में गांठ के लक्षण 

  • कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द

  • पेट या साइड में सूजन

  • थकान और कमजोरी

  • मूत्र में बदलाव

  • भूख कम लगना 

  • उल्टी और मितली

  • पेट में उभार

किडनी में गांठ के कारण 

  • मूत्र मार्ग में रुकावट

  • ज़्यादा नमक और प्रोटीन वाली डाइट

  • शरीर में टॉक्सिन्स का जमाव

  • अनुवांशिकता 

  • जीवनशैली से जुड़ी आदतें

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किडनी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज 

  1.  गिलोय - अगर हम बात करें किडनी के सेहत की तो गिलोय इस स्थिति में एक वरदान की तरह मानी जाती है। इसमें ऐसे बहुत से गुण होते हैं जिस वजह से इसे आयुर्वेद में अमृत कहा गया है। इसका सबसे बड़ा गुण है इसकी डीटॉक्सिफाइंग शक्ति। यह शरीर से गंदे तत्वों को निकाल देती है, जिससे किडनी पर पड़ा अतिरिक्त बोझ कम हो जाता है। जब किडनी साफ़ होती है तो उसके अंदर बनी गांठें या cyst धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती हैं। साथ ही गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज किडनी की सूजन को भी घटाते हैं। इन्ही कारणों की वजह से हम गिलोय को सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि किडनी को नया जीवन देने वाली प्राकृतिक औषधि भी मान सकते हैं साथ ही इसे किडनी में गांठ की आयुर्वेदिक दवा भी कहा जाता है। 

    गिलोय

  2. पुनर्नवा - पुनर्नवा को किडनी के लिए बहुत ही प्रभावशाली और सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, किडनी में गांठ बनना शरीर में कफ दोष और टॉक्सिन्स की वजह से होते हैं,  पुनर्नवा इन दोनों को खत्म करने में माहिर है। यह पेशाब की मात्रा को बढ़ाती है जिससे शरीर में रुका हुआ एक्स्ट्रा पानी और टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकल जाएँ। इसकी एक खास बात यह भी है कि यह सिर्फ़ मूत्र प्रवाह नहीं बढ़ाती, बल्कि किडनी की कोशिकाओं को फिरसे जीवित करने की शक्ति भी रखती है। यही वजह है कि इसे किडनी रीजनरेटिव हर्ब भी कहा जाता है। इसके अलावा पुनर्नवा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद हैं, जो किडनी को अंदरूनी संक्रमण या फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। यह रक्त को शुद्ध करती है, जिससे टॉक्सिन्स दोबारा जमा नहीं होते। जब शरीर में शुद्ध रक्त का संचार होता है, तो गांठ का बढ़ना अपने आप रुक जाता है और धीरे-धीरे उसका आकार छोटा होने लगता है।

    पुनर्नवा
  3. गोखरू - किडनी के लिए गोखरू एक बहुत ही प्रभावी और प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है। अगर हम बात करें किडनी में गांठ या cyst बनने की तो  गोखरू इन सभी समस्याओं को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है। साथ ही ये औषधि अपनी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट शक्ति के लिए भी जानी जाती है। किडनी में जब गांठ के कारण सूजन या इंफेक्शन होता है, तो गोखरू उस सूजन को शांत करता है और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से किडनी की रक्षा करता है। और नियमित सेवन से इससे किडनी की सूजन, भारीपन, पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आने की समस्या में भी बहुत राहत मिलती है।

    गोखरू

  4. त्रिफला - त्रिफला तीन फलों के मिश्रण से बनता है जैसे आंवला, हरड़ और बहेड़ा और ये तीनों मिलकर शरीर की हर गहराई तक सफाई करते हैं।  का सबसे बड़ा गुण है इसका डिटॉक्सिफाइंग इफ़ेक्ट। यह शरीर के पाचन तंत्र को मजबूत करता है, क्योंकि जब पाचन अच्छा होता है तो टॉक्सिन्स बनता ही नहीं।  जिससे किडनी पर पड़ा दबाव कम होता है और उसके भीतर बनी गांठें या cyst गलने लगती हैं। इसके अलावा त्रिफला लिवर को भी ऐक्टिव करता है, जो किडनी के साथ मिलकर शरीर से अपशिष्ट निकालने का काम करता है। जब लिवर और किडनी दोनों साथ काम करते हैं, तो शरीर पूरी तरह शुद्ध होने लगता है और गांठ जैसी स्थितियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। इसलिए हम त्रिफला को किडनी में ट्यूमर का घरेलू इलाज भी कह सकते हैं।  
    त्रिफला

     

  5. वरुण - वरुण एक बेहद शक्तिशाली और भरोसेमंद आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है। क्योंकि यह किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट से जुड़ी लगभग हर समस्या में गहराई से असर करती है। जब किडनी में गांठ या cyst बन जाती है, तो इसका मतलब होता है कि शरीर में किसी न किसी तरह का अवरोध या टॉक्सिन्स का जमाव है। साथ ही वरुण रक्त को भी शुद्ध करता है। जब खून में मौजूद टॉक्सिन्स और अपशिष्ट साफ़ होते हैं, तो किडनी पर काम का बोझ कम होता है। यही वजह है कि वरुण को एक नेचुरल डेटोक्सिफिएर  माना गया है। इसके नियमित सेवन से किडनी की कोशिकाएँ पुनर्जीवित होती हैं और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। इसलिए वरुण को किडनी में ट्यूमर का घरेलू इलाज भी माना जाता है। 

आज इस आर्टिकल में हमने बताया किडनी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बताया, लेकिन आप केवल इन सुझावों पर निर्भर ना रहें समस्या अगर ज्यादा गंभीर है, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें, और ऐसे ही आर्टिकल और ब्लॉग्स के लिए जुड़े रहें आयु कर्मा के साथ।




FAQ

 

  • गांठ के लिए कौन से घरेलू उपाय हैं? 
    किडनी की गांठ में रोज़ गुनगुना पानी पीना बहुत फायदेमंद होता है, इससे किडनी साफ़ होती है। रोज़ हल्का योग, जैसे भुजंगासन करना भी किडनी को सक्रिय रखता है।

     
  • किडनी में गांठ होने पर क्या करें?
    किडनी में गांठ होने पर घबराएँ नहीं, पहले डॉक्टर से जांच जरूर करवाएँ। ज़्यादा पानी पिएँ और नमक-प्रोटीन कम करें और शराब, धूम्रपान और पेनकिलर दवाओं से बचें।

     
  • फिटकरी से गांठ कैसे हटाएं?
    फिटकरी बाहरी गांठ पर ही उपयोगी है, इसे गुनगुने पानी में घोलकर हल्का सेंक करें। पर अंदरूनी गांठ अगर किडनी में हो तो इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

     
  • गांठ होने पर क्या नहीं खाना चाहिए?
    गांठ होने पर नमक, तली चीज़ें, मांस, शराब, ज्यादा प्रोटीन और पैकेट वाले खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए।

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