सांस की बीमारी का देसी इलाज क्या है?
सांस की बीमारी, को आम भाषा में दमा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, या सीओपीडी जैसी श्वसन समस्याओं के रूप में भी जाना जाता है, ये आज के समय में एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, इसे जल्द ही सही करने के लिए बहुत से लोग एलोपैथिक दवाइयों का सहारा लेते हैं पर लंबे समय तक इन पर निर्भर रहना कई बार साइड इफेक्ट्स को जन्म दे सकता है। ऐसी स्थिति में बहुत से लोग देसी और प्राकृतिक इलाज की ओर रुख करते हैं। जो बिना किसी साइड इफेक्ट के फायदा पहुंचाते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे सांस की बीमारी का देसी इलाज क्या है? जिसे आप जानेंगे सांस की बीमारी के कुछ असरदार देसी इलाज, जिन्हें आप घर पर ही आजमा सकते हैं।
सांस की बीमारी के लक्षण
सांस की बीमारी के कारण
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वायु प्रदूषण
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आनुवंशिकता
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धूम्रपान
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एलर्जी
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मोटापा
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मानसिक तनाव
सांस की बीमारी का देसी इलाज क्या है
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अदरक और शहद
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हल्दी वाला दूध
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मुलेठी
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भाप लेना
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तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा
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अदरक और शहद - अदरक और शहद दोनों ही ऐसी प्राकृतिक औषधियों हैं, जो लंबे समय से इस्तेमाल होते आ रहे हैं, खासकर सांस की बीमारी के इलाज में। अदरक में पाए जाने वाले जिंजरोल्स और शोगोल्स जैसे सक्रिय यौगिकों में तेज़ सूजन-रोधी, एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। ये यौगिक फेफड़ों और गले की सूजन को कम करते हैं, जिससे सांस लेना आसान होता है। अदरक कफ को ढीला करता है और उसे बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे फेफड़ों की सफाई होती है। वहीं शहद एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और सूजनरोधी है, जो गले की खराश को शांत करता है और श्वास नली को चिकनाहट प्रदान करता है। यह गले में जमा बलगम को ढीला करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। शहद की मिठास न केवल स्वाद में राहत देती है, बल्कि यह फेफड़ों को भी आराम देती है।

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हल्दी वाला दूध - सांस की बीमारी में हल्दी वाला दूध एक बहुत ही प्रभावशाली घरेलू उपाय माना जाता है। क्योंकि हल्दी में करक्यूमिन नामक एक शक्तिशाली यौगिक होता है, जो प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल, और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। यह श्वसन तंत्र में आई सूजन को कम करता है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है। हल्दी शरीर में जमे विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद करती है, जिससे फेफड़ों की सफाई होती है और संक्रमण का खतरा कम होता है। दूसरी और दूध में कैल्शियम और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं और श्वसन प्रणाली को मज़बूत करते हैं। जब हल्दी को गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो यह शरीर को भीतर से गर्माहट प्रदान करता है और सांस की नलियों को खोलने में सहायता करता है। इससे खांसी, बलगम, और गले की खराश में राहत मिलती है।

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मुलेठी - मुलेठी सांस की बीमारियों में एक प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है। मौजूद मुख्य सक्रिय घटक है ग्लाइसीरिज़िन, जो सूजनरोधी और रोगाणुनाशक गुणों से भरपूर होता है। यह फेफड़ों और सांस की नलियों में आई सूजन को कम करता है, जिससे सांस लेना आसान होता है। साथ ही मुलेठी की मिठास और चिकनाह ट गले की जलन और खिचखिच को शांत करती है। यह गले की सूखी या लगातार बनी रहने वाली खांसी में राहत देती है, जो अक्सर सांस की बीमारियों के साथ जुड़ी होती है। इसके सेवन से वायुमार्ग को नमी मिलती है, जिससे सूखा गला और खराश में काफी आराम मिलता है।

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भाप लेना - भाप लेना एक सरल लेकिन बहुत ही प्रभावी घरेलू उपचार माना जाता है। क्योंकि जब आप गर्म पानी की भाप लेते हैं, तो वह आपकी नाक, गले और फेफड़ों में जमी हुई चिपचिपी बलगम को ढीला करती है। इससे बलगम आसानी से बाहर निकलने लगता है और सांस की नलियाँ खुल जाती हैं, जिससे सांस लेना सरल हो जाता है। यह प्रक्रिया अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सर्दी-जुकाम और एलर्जी जैसी बीमारियों में बहुत लाभदायक होती है। हालांकि, भाप लेते समय सावधानी रखना जरूरी है। पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो ताकि त्वचा या नाक न जले। बच्चों, बुज़ुर्गों या हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भाप लेते समय विशेष सतर्कता रखनी चाहिए और ज़रूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।

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तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा - तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा सांस की बीमारी के लिए एक पुराना और प्रभावशाली घरेलू उपाय है। तुलसी एक पवित्र और औषधीय पौधा है जिसे आयुर्वेद में "रोग नाशिनी" कहा गया है, जबकि काली मिर्च एक शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सिडेंट है जो फेफड़ों की सफाई में सहायक होती है। आप चाहें तो इस काढ़े में चाहें तो थोड़ी अदरक, मुलेठी या शहद भी मिलाया जा सकता है, जिससे इसके औषधीय गुण और भी बढ़ जाते हैं। लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक गर्म प्रकृति होने के कारण यह शरीर में गर्मी भी बढ़ा सकता है। इसलिए जिन्हें गैस, अल्सर या पेट की गर्मी की समस्या हो, वे इसे सावधानी से लें।
आज इस आर्टिकल में हमने बताया सांस की बीमारी का देसी इलाज क्या है और आपने जाना की कैसे कुछ आयुर्वेदिक उपचार से इस समस्या में आपके काम आ सकते हैं, लेकिन आप केवल इन सुझावों पर निर्भर ना रहें समस्या अगर ज्यादा गंभीर है, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें, और ऐसे ही आर्टिकल और ब्लॉग्स के लिए जुड़े रहें आयु कर्मा के साथ।
FAQ
सांस की बीमारी को कैसे खत्म करें?
आयुर्वेद, योग, और परहेज के साथ डॉक्टर की सलाह लें। धूल-धुएँ से बचें, भाप लें, हल्दी-दूध, तुलसी काढ़ा, अदरक-शहद का सेवन करें और नियमित प्राणायाम करें।
सांस फूलती है तो क्या खाना चाहिए?
सांस फूलने पर हल्का, सुपाच्य और गर्म भोजन खाना चाहिए।
सांस किसकी कमी से फूलता है?
सांस आमतौर पर ऑक्सीजन की कमी, फेफड़ों की कमजोरी, एलर्जी, अस्थमा, मोटापा या दिल की बीमारी के कारण फूलता है।
अस्थमा को जड़ से कैसे खत्म करें?
अस्थमा को पूरी तरह जड़ से खत्म करना मुश्किल है, लेकिन आयुर्वेद, प्राणायाम, परहेज, और नियमित इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।