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शरीर में सूजन की आयुर्वेदिक दवा

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शरीर में सूजन की आयुर्वेदिक दवा

शरीर में सूजन की आयुर्वेदिक दवा

शरीर में सूजन एक बहुत ही आम लेकिन गंभीर समस्या है, जिससे लोगों को आम दिनों में कई परेशानियाँ हो सकती है, और अगर ये सूजन अधिक समय तक बनी रहे या बार-बार होती है, तो यह बहुत सी बीमारियों का कारण भी बन सकती है। बहुत से लोग जो इस समस्या से पीड़ित हैं वो आधुनिक दवाइयों की मदद से सूजन को जल्द ही कम कर सकते हैं, पर हमेशा ये समझना जरूरी है की इन सभी दवाइयों के बहुत से साइड इफेक्ट भी हैं, इसलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे शरीर में सूजन की आयुर्वेदिक दवा साथ ही इसके लक्षणों और कारणों पर भी ध्यान देंगे जिससे आप समय रहते इस समस्या पर ध्यान दे सकें। 

शरीर में सूजन के लक्षण 

  • लालिमा 

  • दर्द

  • गर्मी

  • सूजन

  • प्रभावित अंग को हिलाने-डुलाने में कठिनाई होना

  • वजन में बदलाव

शरीर में सूजन के कारण 

  • आघात या चोट: शरीर किसी चोट या मोच के बाद सूजन द्वारा उस हिस्से की रक्षा और मरम्मत करता है।

  • एलर्जी: एलर्जी से शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया तेज हो जाती है, जिससे सूजन, खुजली या लालिमा हो सकती है।

  • संक्रमण: वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के संक्रमण से संक्रमित अंग में सूजन और दर्द होना सामान्य है।

  • गलत खानपान: प्रोसेस्ड फूड, चीनी और अधिक वसा वाले भोजन शरीर में सूजन पैदा करने वाले तत्व बढ़ा देते हैं।

  • तनाव: लंबे समय तक बना तनाव हार्मोनल बदलाव लाकर शरीर में धीमी लेकिन स्थायी सूजन को जन्म देता है।

  • डायबिटीज़: अनियंत्रित ब्लड शुगर कोशिकाओं में सूजन को बढ़ावा देता है और ऊतकों को नुकसान पहुँचाता है।

  • थायरॉइड की समस्या: हाइपोथायरॉइडिज्म में चयापचय धीमा हो जाता है, जिससे शरीर में सूजन और भारीपन बढ़ सकता है।

  • हार्मोनल असंतुलन: एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन या कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का असंतुलन सूजन को ट्रिगर कर सकता है।

 

शरीर में सूजन की आयुर्वेदिक दवा
 

  1. गिलोय - गिलोय एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, ये मुख्य रूप से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने, सूजन को कम करने और शरीर को संतुलित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद सक्रिय यौगिक जैसे अल्कलॉइड्स, स्टेरॉइड्स और टेरपेनॉइड्स शरीर की सूजन को कम करने में प्रभावी माने जाते हैं। साथ ही गिलोय शरीर को डीटॉक्स करता है, यानी शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। ये टॉक्सिन्स भी सूजन का एक बड़ा कारण हो सकते हैं और ये मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है, जिससे तनाव से जुड़ी सूजन भी नियंत्रित होती है। इसलिए इसे हम सूजन को जड़ से खत्म करने की दवा भी कह सकते हैं।

    गिलोय
  2. हल्दी - हल्दी अत्यंत प्रभावशाली और पुरातन औषधीय जड़ी-बूटी है, इसमें पाया जाने वाला सक्रिय तत्व करक्यूमिन प्राकृतिक रूप से सूजन-रोधी, एंटीऑक्सीडेंट और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला होता है। यह गुण हल्दी को सूजन से जुड़ी कई समस्याओं के इलाज में उपयोगी बनाते हैं। साथ ही शरीर के भीतर सूजन के मूल कारणों पर काम करती है। जब शरीर में कोई चोट, संक्रमण या विषाक्तता होती है, तो शरीर एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया स्वरूप सूजन पैदा करता है। हल्दी इस प्रतिक्रिया को संतुलित करती है और अनावश्यक या लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन को कम करती है। 
    हल्दी
  3. ब्राह्मी - ब्राह्मी एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो मुख्य रूप से मस्तिष्क के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए जानी जाती है। शरीर में होने वाली क्रॉनिक यानी दीर्घकालिक सूजन पर गहराई से काम करती है, विशेष रूप से वह सूजन जो तनाव, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, या नर्वस सिस्टम की गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होती है। यह जड़ी-बूटी शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित करती है, जिससे अनावश्यक सूजन नहीं होती, और यदि सूजन हो भी रही हो तो वह धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए इसे शरीर की सूजन कम करने की आयुर्वेदिक दवा भी कह सकते हैं।
    ब्राह्मी

 

  1. अदरक - अदरक को आयुर्वेद में शुण्ठी कहा जाता है, साथ ही ये बहुत से घरों में हर दिन प्रयोग किए जाने वाला खाद्य पदार्थ पर इसके फायदे से बहुत से लोग वंचित रहते हैं, इसमें मौजूद सक्रिय तत्व जिंजरॉल प्राकृतिक सूजन-रोधी, दर्दनाशक और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर में सूजन को जड़ से कम करने की क्षमता रखता है। ये जोड़ों की सूजन और दर्द में बहुत उपयोगी होता है, विशेष रूप से गठिया, रूमेटॉइड आर्थराइटिस और ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों में। इसलिए इसे गठिया और सूजन का आयुर्वेदिक इलाज भी माना जाता है।
    अदरक
  2. नीम - नीम की पत्तियाँ, छाल, फल, बीज और तेल सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। नीम में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यौगिक जैसे निम्बिन, निम्बिडिन, क्वेर्सेटिन और गैडिनिन में मजबूत एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये यौगिक शरीर में सूजन उत्पन्न करने वाले एंज़ाइम्स और साइटोकाइन्स की क्रिया को नियंत्रित करते हैं, जिससे आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की सूजन में राहत मिलती है। साथ ही नीम का असर आंतरिक सूजन पर भी होता है। यह आंतों की सूजन, पाचन की गर्मी, पेट की जलन, और अल्सर जैसी स्थितियों में शांत प्रभाव डालता है। नीम की कड़वी तासीर पेट को ठंडक देती है और पाचन तंत्र को बैलेंस में रखती है।
    नीम


 

आज के इस आर्टिकल में हमने शरीर में सूजन की आयुर्वेदिक दवा के विषय में बताया, लेकिन आप सिर्फ इन सुझावों पर निर्भर ना रहें समस्या अगर ज्यादा गंभीर है तो डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेद अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें अयुकर्मा के साथ


 

FAQ

 

  • आयुर्वेद में शरीर में सूजन जल्दी कैसे कम करें? 
    आयुर्वेद में शरीर की सूजन कम करने के लिए हल्दी, अदरक, गिलोय, नीम और त्रिफला जैसी जड़ी-बूटियाँ सेवन करें, गर्म पानी पीएँ, ताजा और सादा भोजन लें, तैलीय और प्रोसेस्ड फूड से बचें, और रोज़ अभ्यंग (तेल मालिश) व योग करें।

     
  • सूजन का रामबाण इलाज क्या है?
    सूजन का रामबाण इलाज है हल्दी दूध का सेवन, गिलोय और अदरक का काढ़ा, नीम से शरीर की सफाई, साथ में सादा आहार, तेल मालिश और तनावमुक्त दिनचर्या अपनाना।

     
  • शरीर में सूजन होने पर क्या नहीं खाना चाहिए?  
    शरीर में सूजन होने पर तला-भुना खाना, ज्यादा मसाले, चीनी, मैदा, जंक फूड, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए।

 

Dr Puneet Dhawan
Ayurvedic Expert

Dr. Puneet Dhawan

Dr. Puneet is a highly respected Ayurvedic expert known for his deep knowledge and compassionate approach towards treating chronic health issues.

His USP is meticulously addressing the root cause of the disease rather than just superficially attending the surface level symptoms.

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